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माछरौली में संपन्न हुई शिक्षा में नैतिकता संगोष्ठी: पवन जिंदल, ओ पी धनखड़, बीपी राणा व संजय राठी समेत पहुंचे दिग्गज

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट)माछरौली में शुक्रवार को शिक्षा में नैतिकता विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई । संगोष्ठी में प्रख्यात समाज सेवा एवं उद्योगपति पवन जिंदल ने बतौर मुख्य वक्ता, संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय सचिव औमप्रकाश धनखड़, बतौर विष्टि अतिथि डी सी कैप्टन शक्ति सिंह ,विशेष आमंत्रित अतिथि प्रदेश अध्यक्ष हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट संजय राठी और कार्यक्रम संयोजक डाइट प्राचार्य बी पी राणा ने शिक्षा में नैतिकता विषय पर अपने विचार साझा किए। राष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन निपुण भारत योजना के जिला समन्यक डॉ सुदर्शन पूनिया ने किया।


मुख्य वक्ता डॉ पवन जिंदल ने कहा कि भारतीय संस्कृति सर्वश्रेष्ठ है और दुनिया में फिर से भारतीय संस्कृति का बोलबाला कायम हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश की गुलामी के खंड काल में पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव हमारी संस्कृति पर विपरित रूप से पड़ा । अंग्रेजी शासकों ने हमारे ऊपर अपनी शिक्षा पद्धति थोपी। अंग्रेजी शिक्षा पद्धति भारतीय संस्कारों के अनुरूप नहीं थी। गुलामी की दास्ता को तोड़ना होगा और अपनी सोच बदलनी होगी। आने वाली पीढ़ी कैसी हों यह हमारे काम का परिणाम होगी। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की है। इसलिए आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है । भारतीय नैतिक मूल्यों को दोबारा से स्थापित करने का दायित्व परिवारों व शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संस्थाओं का है। हमारे राजकीय स्कूल किसी से कम नहीं हैं। शिक्षक चुनौतियों को स्वीकार करना सीखें। उन्होंने कहा कि शिक्षा नि शुल्क होनी चाहिए, व्यापार से शिक्षा नहीं मिल सकती। नैतिक रूप से श्रेष्ठ होना ही भारतीयता की पहचान है।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव धनखड़ ने कहा कि व्यक्ति को बड़ा दायित्व मिलने पर न्याय करना चाहिए। इससे अच्छी व्यवस्था बनेगी और नैतिकता आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि संस्कार का अर्थ है पक्का विचार ।

संस्कार व्यक्ति के आचरण और व्यवहार को नियंत्रण करते हैंं। पक्का विचार है कि अपने से बड़ों का सम्मान करते हैं। पक्का विचार यानि संस्कार परिवार, आस-पास के माहौल और शिक्षण संस्थानों व संस्थाओं से मिलते हैं। विशेषकर स्कूलों में मिलने वाली शिक्षा से छात्र जीवन में कई पक्के विचार मिलते हैं। बच्चों को बड़ा घ्येय दें, बड़ा लक्ष्य दें, पढ़ने की आदत डालें, दुनिया तेजी से बदल रही है इसलिए उनको तकनीक के साथ अपडेट रहने की आदत डालें। अपना श्रेष्ठ दें और दूसरे का श्रेष्ठ लेने की बात सिखाएं। शिक्षक अगर छात्रों को अच्छे संस्कार देंगे तो निश्चित रूप से छात्र उक्त शिक्षक को ताउम्र याद रखेंगे। उन्होंने कहा कि आरएसएस से उनको पक्के विचार मिले कि मानवता की सेवा करनी चाहिए। आरएसएस केंद्र , गुरूकुल और परिवार अच्छे संस्कार प्राप्त करने केंद्र हैं।


डी सी कैप्टन शक्ति सिंह ने संगोष्ठी में अपना वक्तव्य रखते हुए कहा कि विदेशी शासकों ने सुनियोजित ढंग से भारतीय संस्कृति व परंपराओं को दबाने का प्रयास किया। पश्चिमी संस्कृति को अच्छा बताकर हमें उनके अनुसार ढ़ालने की कौशिश की गई। हमारी परम्पराओं, शिक्षा, चिकित्सा पद्धति को कमतर बताया गया और हम मानते चले गए। समय बदल रहा है, अब हालत ये हैं कि उल्टे पश्चिमी देश हमारी प्राचीन पद्धतियों को अपनाने को विवश हुए हैं। हमारी संस्कृति और परम्पराएं श्रेष्ठï हैं। नई शिक्षा नीति से बड़े बदलाव आएंगे । हरियाणा सरकार ने वर्ष 2025 तक नई शिक्षा नीति को लागू करने की घोषणा की है और इस दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है । उन्होंने कहा कि शिक्षक अभिभावकोंं के विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करें, अपने सुधार हो जाएगा।


संजय राठी ने कहा सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में शिक्षा की अहम भूमिका रही है। शिक्षक सार्थक चिंतन करें और नैतिक मूल्यों पर आधारित अच्छे समाज निर्माण में अपनी निर्णायक भूमिका निभाएं। समाज में शिक्षक को गुरु का दर्जा प्राप्त है और गुरुजी की बात को ध्यान से सुना जाता रहा है। डाइट प्राचार्य बी पी राणा ने सभी वक्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकार ने कर्मयोगी योजना शुरू की है। सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को योजना के तहत नैतिकता शिक्षा दी जा रही है। जिसमें सांसारिक व आध्यात्मिक जीवन पर फोकस किया गया है। इस अवसर पर राज सिंह नांदल, समाजसेवी महेंद्र बंसल, डीईओ राजेश कुमार, डीईईओ सुभाष भारद्वाज सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।

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