ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हरियाणा की डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरमन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में ब्रॉन्ज मेडल डाला। गुरुवार देर रात स्कॉटस्टाउन स्टेडियम में हुए महिला डिस्कस थ्रो फाइनल में सीमा ने अपने तीसरे प्रयास में 58.65 मीटर का बेहतरीन थ्रो कर तीसरा स्थान हासिल किया।

इस स्पर्धा में जमैका की सामंथा हॉल ने गोल्ड और कनाडा की जूलिया टंक्स ने सिल्वर मेडल जीता। सीमा के इस पदक के साथ भारत के कुल 17 मेडल हो गए हैं, जिनमें 3 गोल्ड, 10 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज शामिल हैं।

4 थ्रो फाउल, फिर भी नहीं हारी हिम्मत

फाइनल मुकाबले में सीमा को छह प्रयास मिले, लेकिन उनमें से चार थ्रो फाउल रहे। दूसरे प्रयास में उन्होंने 57.32 मीटर का थ्रो किया और तीसरे प्रयास में 58.65 मीटर की दूरी तय कर ब्रॉन्ज मेडल लगभग पक्का कर लिया। बाद के तीन प्रयास फाउल रहे, लेकिन कोई भी खिलाड़ी उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को पीछे नहीं छोड़ सका।

प्रेग्नेंसी के कारण दो सीजन रहीं बाहर

हरियाणा के भिवानी जिले के दिनोद गांव की रहने वाली 27 वर्षीय सीमा कालीरमन के लिए यह सफर आसान नहीं था। बेटे रुद्र के जन्म के कारण उन्हें दो सीजन तक मैदान से दूर रहना पड़ा। हालांकि, बेटे के जन्म के 11 महीने बाद उन्होंने दोबारा कड़ी ट्रेनिंग शुरू की और शानदार वापसी करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीत लिया।

पति बने कोच, बेटे ने बढ़ाया हौसला

सीमा के पति रविंदर खुद नेशनल स्तर के डिस्कस थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं। चोट के कारण उनका खेल करियर आगे नहीं बढ़ पाया, लेकिन उन्होंने अपनी पत्नी को कोचिंग देकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

सीमा अक्सर कहती हैं कि उनका चार साल का बेटा रुद्र उनका सबसे बड़ा मोटिवेटर है। वह बताती हैं कि जब भी वे अच्छा थ्रो करती हैं तो बेटा खुशी से कहता है, “हां मम्मी, वेरी गुड… आपने बहुत अच्छा किया।” बेटे की यही छोटी-सी तारीफ उन्हें सबसे ज्यादा प्रेरित करती है।

पीएचडी के साथ खेल में भी कमाल

सीमा चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी, भिवानी से फिजिकल एजुकेशन में पीएचडी कर रही हैं। पढ़ाई, परिवार और खेल—तीनों जिम्मेदारियों को साथ लेकर चलने वाली सीमा आज देश की शीर्ष डिस्कस थ्रो खिलाड़ियों में शामिल हैं।

नेशनल गोल्ड से कॉमनवेल्थ ब्रॉन्ज तक

कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले सीमा ने भुवनेश्वर में आयोजित नेशनल इंटर-स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 59.73 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाई और 2026 एशियन गेम्स के लिए भी क्वालिफाई किया।

इससे पहले वह 2025 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चौथे स्थान पर रही थीं, जबकि 2025 साउथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।

संघर्ष से सफलता तक की मिसाल

प्रेग्नेंसी के बाद दोबारा फिटनेस हासिल करना, मैदान पर वापसी करना और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना सीमा कालीरमन की मेहनत, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग की शानदार मिसाल बन गया है। उनका यह ब्रॉन्ज मेडल हरियाणा ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। इस टेक्स्ट के आधार पर फेसबुक के लिए एक थंबनेल बना दें और बाईं ओर ऊपर कोने में AI लिखें और दाईं ओर ऊपर कोने में दिया गया लोगो चित्र में लगा दें

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