हरियाणा के करनाल जिले के असंध एसडीएम कार्यालय में तैनात एक क्लर्क को रिश्वत मांगने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पर जमीन से जुड़े एक मामले में दस्तावेज और सरकारी औपचारिकताएं पूरी करवाने के बदले साढ़े 11 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया था। पूछताछ पूरी होने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
मामले की जानकारी देते हुए डीएसपी गोरखपाल राणा ने बताया कि करीब सात महीने पहले शिकायतकर्ता ज्ञानचंद के बेटे हरीश ने पुलिस को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत के साथ एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी गई थी, जिसमें क्लर्क विक्रम कथित रूप से रिश्वत की रकम मांगता हुआ सुनाई दे रहा था।
पुलिस ने ऑडियो की फोरेंसिक और तकनीकी जांच करवाई। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद करनाल मंडल आयुक्त (कमिश्नर) से अभियोजन की अनुमति ली गई और आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस के अनुसार, 25 जून को आरोपी विक्रम को खेड़ी सरफली के पास से गिरफ्तार किया गया। अदालत से एक दिन का पुलिस रिमांड मिलने के बाद उससे गहन पूछताछ की गई। रिमांड पूरा होने पर उसे दोबारा कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जांच में सामने आया कि एक जमीन के सौदे से जुड़े दस्तावेज और अन्य सरकारी प्रक्रियाएं पूरी करवाने के एवज में आरोपी ने शिकायतकर्ता से साढ़े 11 लाख रुपये की मांग की थी। उसने भरोसा दिलाया था कि पूरा काम बिना किसी परेशानी के करवा दिया जाएगा। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपी के बैंक खाते से 50 हजार रुपये की राशि भी बरामद की है, जिसकी जांच की जा रही है।
सबसे अहम खुलासा ऑडियो रिकॉर्डिंग से हुआ है। डीएसपी के मुताबिक, रिकॉर्डिंग में आरोपी यह कहते हुए सुनाई दे रहा है कि रिश्वत की यह रकम उसे आगे “साहब” तक पहुंचानी है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर यह “साहब” कौन है और क्या इस मामले में कोई अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले असंध एसडीएम कार्यालय में कार्यरत था, बाद में उसकी ड्यूटी तहसीलदार कार्यालय में लगाई गई थी। पिछले करीब छह महीने से वह निलंबित चल रहा था और उसकी तैनाती करनाल मुख्यालय में थी।
पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले में विभाग के कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। यदि जांच में उनके खिलाफ सबूत मिलते हैं तो उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस ऑडियो रिकॉर्डिंग, बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यदि “साहब” तक रिश्वत पहुंचाने के आरोप की पुष्टि होती है, तो यह मामला सिर्फ एक क्लर्क तक सीमित न रहकर बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे में भी बदल सकता है।

