रोहतक PGI में डॉक्टरों ने एक बार फिर मेडिकल क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। ईएनटी विभाग की टीम ने महज 3 साल के मासूम बच्चे के फेफड़े में फंसा लोहे का पेंच बिना कोई चीरा लगाए सफल ऑपरेशन के जरिए बाहर निकाल दिया। नारनौल निवासी यह बच्चा अब पूरी तरह खतरे से बाहर है और तेजी से स्वस्थ हो रहा है। इस सफल ऑपरेशन के बाद हेल्थ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने भी डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है।
डॉ. रमन बडेरा के मुताबिक बच्चा 13 जुलाई को बिस्तर से गिर गया था, जिसके कारण उसकी बाईं जांघ की हड्डी टूट गई थी। पहले नारनौल अस्पताल में प्लास्टर लगाया, फिर 8-9 दिन एक निजी अस्पताल में इलाज चला। 22 जुलाई तक परिवार को लगा सब सामान्य है।
डॉ. रमन बडेरा के मुताबिक 23 जुलाई को जांघ के ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों ने छाती का रूटीन एक्स-रे करवाया तो रेडियोलॉजिस्ट भी चौंक गए। एक्स-रे में दाहिने फेफड़े के निचले हिस्से में एक धातुनुमा पेंच साफ दिखाई दे रहा था। घरवालों को याद भी नहीं कि बच्चे ने कब और कैसे इसे निगल लिया। कोई घाव नहीं था और न ही कोई लक्षण।
डॉ. रमन बडेरा के मुताबिक निजी अस्पताल से बच्चे को पीजीआई रेफर किया गया, जहां सीटी स्कैन में पुष्टि हो गई कि पेंच दाहिने ब्रोंकस इंटरमीडियस में फंस चुका है। डॉक्टरों के लिए यह बेहद दुर्लभ और खतरनाक स्थिति थी। पेंच कभी भी सांस की नली को पूरी तरह ब्लॉक कर सकता था। पेंच को बिना ऑपरेशन बाहर निकालना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि थोड़ी सी गलती से बच्चे की जान पर बन सकती थी।
डॉ. रमन बडेरा के मुताबिक रीजिड ब्रोंकोस्कोपी तकनीक के जरिए जनरल एनेस्थीसिया में ऑपरेशन किया गया। इस प्रक्रिया में गले के रास्ते एक पतली दूरबीन डालकर बिना शरीर पर कोई चीरा लगाए पेंच को ढूंढा गया और सकुशल बाहर निकाल लिया गया। करीब 2 घंटे चला ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। अब बच्चा तेजी से रिकवर कर रहा है।

