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रोहतक के गांव रिठाल में स्कूली छात्रों का प्रदर्शन, पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर जताया रोष

रोहतक, 22 जुलाई। रोहतक जिले के गांव रिठाल स्थित सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों ने मंगलवार को कक्षाओं का बहिष्कार कर स्कूल के बाहर धरना प्रदर्शन किया। छात्र वर्दी में ही स्कूल परिसर से बाहर सड़क पर बैठ गए और पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी तथा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ हुए व्यवहार के विरोध में नारेबाजी की।

छात्रों के अनुसार, हड़ताल करना उनका शौक नहीं बल्कि मजबूरी है। उनका कहना था कि जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर पहुंचे युवाओं के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया गया। छात्रों के अनुसार, आए दिन हो रहे पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के कारण युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन युवाओं के साथ बर्बरता की गई, जिसका देशभर में विरोध हो रहा है।

प्रदर्शन के दौरान गांव के ग्रामीण भी छात्रों के समर्थन में मौके पर पहुंचे। छात्र लंबे समय तक स्कूल के बाहर धरने पर बैठे रहे और लगातार नारेबाजी करते रहे। उमेद सिंह के अनुसार, सरकार अपनी हठधर्मिता पर कायम है। उनके अनुसार, जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवा पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने पहुंचे थे, लेकिन जवाब देने के बजाय उन पर लाठियां और आंसू गैस के गोले चलाए गए।उमेद सिंह के अनुसार, किसान घाट पर प्रस्तावित महापंचायत से पहले कई किसान नेताओं को उनके घरों में ही रोक दिया गया और दिल्ली जाने से रोका गया। उनके अनुसार, लोकतंत्र में सभी नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सरकार आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है।उमेद सिंह के अनुसार, जंतर-मंतर पर एकत्रित युवा अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से उठा रहे थे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, लेकिन उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, जिसमें कई युवा घायल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने तथा रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

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