हिंदू धर्म में हर त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। संकट काटने वाले चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान के साथ पूजा करने से दुख हरता गणेश हर किसी की मनोकामना पूरी करते हैं। पूर्णिमा के बाद आने वाली इस चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी और अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। इस बार संकष्टी चतुर्थी 12 नवंबर को मनाई जाएगी। दोनों ही चतुर्थी में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि यदि इस दिन विधि-विधान से पूजा की जाए तो भगवान गणेश भक्तों के कष्ट हर लेते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं पूजा की विधि और महत्व…

पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह उठकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ कपड़े पहनें। आप इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद उत्तर दिशा की ओर मुंह कर बैठे। इस दिशा की ओर मुंह करके विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करें। पूजा में आप भगवान गणेश को तिल के लड्डू या फिर मोदक का भोग लगा सकते हैं। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। व्रत के दौरान आप अन्न  का सेवन न करें। आप फल इत्यादि व्रत में खा सकते हैं। सेंधा नमक का सेवन भी आप संकष्टी चतुर्थी के व्रत में कर सकते हैं। 

मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से श्री गणेश की पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। घर में भी सुख-समृद्धि का वास होता है। घर में भी शांति बनी रहती है। व्रत की शुरुआत सूर्योदय से होती है और रात को चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का समापन होता है। 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान शिव और मां पार्वती नदी के पास बैठे हुए थे। इसी दौरान मां पार्वती ने चौपड़ नाम का एक खेल खेलने की इच्छा भगवान शिव के सामने रखी। खेल में निर्णायक समस्याएं आ रही थी। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए मां पार्वती ने एक बाल को मिट्टी की प्रतिमा का रुप दे दिया और उसमें प्राण भी डाल दिए। इसके बाद खेल शुरु हो गया लेकिन इस खेल में भगवान शिव लगातार हार ही रहे थे। एक बार तो बालक ने मां पार्वती को हारा हुआ घोषित कर दिया। जिसके बाद मां पार्वती उस बालक से नाराज हो गई थी। मां पार्वती ने बालक को श्राप दे दिया और उस बालक का एक पैर भी खराब हो गया। बालक ने दुखी होकर मां पार्वती से क्षमा मांगी। जिस पर मां पार्वती ने कहा कि संकष्टी के दिन यहां कन्याएं पूजा के लिए आती हैं। इस दिन तुम विधि पूछकर गणेश भगवान की पूजा करना वो तुम्हें श्राप से मुक्त कर देंगे। मां पार्वती के कथानुसार बालक ने श्री गणेश की पूजा की जिसके बाद मां पार्वती उससे प्रसन्न हो गई और उसे श्राप मुक्त कर दिया। 

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