हिमाचल प्रदेश में मानसून की भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. मंडी जिले में हो रही लगातार बारिश से सभी नदी-नाले उफान पर हैं. कई जगहों पर भूस्खलन, पुलों के बहने और रास्तों के टूटने की खबरें आ रही हैं. ऐसे हालातों में लोगों को भी जब तक जरूरी न हो घरों से न निकलने की सलाह दी गई है. लेकिन कुछ काम ऐसे होते हैं जिसमें घर बैठना मुमकिन नहीं है. खास तौर पर डॉक्टर और इस पेशे से जुड़े लोगों के लिए. ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है. इस वीडियो में एक नर्स के जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है. मंडी जिले के चौहार घाटी की एक महिला ने ऐसा साहसी कदम उठाया, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा.
टिककर गांव की रहने वाली और सुधार स्वास्थ्य केंद्र में तैनात स्टाफ नर्स कमला देवी ने वो कर दिखाया जिसके लिए डॉक्टरों और इस पेशे से जुड़े लोगों को जाना जाता है. कमला देवी ने अपने साहस से एक मिसाल कायम की है. वे 20 अगस्त को वैक्सीनेशन ड्यूटी के लिए कठोग पंचायत के अंतर्गत हुरंग गांव जा रही थीं. लेकिन रास्ते में बादल फटने के कारण आई बाढ़ से शिल्हबुधानी पंचायत के नाले पूरी तरह उफान पर थे और पैदल पुलिया बह चुकी थीं. ऐसे में गांव तक पहुंचना लगभग असंभव हो गया था.
कमला देवी ने बिना किसी डर के, पूरी हिम्मत के साथ उफनते नाले को छलांग लगाकर पार किया. यह दृश्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था. सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो को देखकर लोग अभिनेता ऋतिक रोशन की फिल्म कृष की याद करने लगे, जिसमें नायक भी कुछ इसी तरह जान जोखिम में डालता है.
कमला देवी जानती थीं कि उनका वहां पहुंचना जरूरी है क्योंकि उन्हें गांव में बच्चों और महिलाओं को वैक्सीन देनी थी. उनके इस साहसिक कदम ने यह साबित कर दिया कि जब बात मानवता की सेवा की होती है तो हिमाचल जैसे दुर्गम इलाकों के लोग अपनी जान की परवाह किए बिना आगे बढ़ जाते हैं. नर्स कमला देवी न केवल स्वास्थ्य सेवा की प्रतिनिधि बनकर उभरी हैं, बल्कि उन्होंने यह भी दिखाया कि सच्चा सेवाभाव केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म में झलकता है.
मानसून की मार और प्राकृतिक आपदाओं के बीच कमला देवी जैसी नर्सें ही सच्चे हीरो हैं. उनका साहस, समर्पण और सेवा भाव हमें यह सिखाता है कि असली नायक वही होता है जो दूसरों के लिए खुद को खतरे में डालने से नहीं डरता.

