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हरियाणा के स्कूलों में शुरू होगा ‘साथ’ प्रोजेक्ट: 122 काउंसलर करेंगे विद्यार्थियों की पहचान, मानसिक सेहत पर सरकार का फोकस

चंडीगढ़। हरियाणा के स्कूलों में विद्यार्थियों की मानसिक सेहत को लेकर सरकार नई पहल करने जा रही है। प्रस्तावित ‘साथ’ प्रोजेक्ट के तहत कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल आधारित मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों में तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं की समय रहते पहचान कर उन्हें जरूरी मदद उपलब्ध कराना है।

पंचकूला में 6 साल की बच्ची के साथ स्कूल के एक नाबालिग छात्र द्वारा मारपीट की घटना के बाद स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग ने इस दिशा में पहल तेज की है। योजना के तहत परीक्षा का तनाव, बुलिंग, सामाजिक अलगाव और अत्यधिक स्क्रीन इस्तेमाल जैसी समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें शिक्षकों और अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग के 122 काउंसलर चिन्हित

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में स्वास्थ्य विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के साथ शिक्षक, अभिभावक, छात्र स्वयंसेवक, परामर्शदाता, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और मनोचिकित्सक मिलकर काम करेंगे।

विद्यार्थियों को पेशेवर सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के 122 काउंसलरों को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा मनोविज्ञान की योग्यता रखने वाले शिक्षकों और विशेष मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भी मदद ली जाएगी।

उम्र के हिसाब से तैयार होगी सहायता व्यवस्था

प्रोजेक्ट में विद्यार्थियों की उम्र और उनकी मनोवैज्ञानिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग सहायता व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है। रूपरेखा में कक्षा 5 से 8 और कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए अलग दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई है।

इस व्यवस्था के माध्यम से बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति में आने वाले बदलावों पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि किसी समस्या के गंभीर होने से पहले ही उन्हें उचित परामर्श और विशेषज्ञों की मदद मिल सके।

शिक्षक और अभिभावक भी होंगे योजना का हिस्सा

‘साथ’ प्रोजेक्ट में केवल काउंसलरों पर निर्भर रहने के बजाय शिक्षकों और अभिभावकों को भी जागरूक करने की योजना है। स्कूलों में बच्चों के व्यवहार को समझने, उनकी समस्याएं सुनने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

सरकार की इस पहल का मकसद विद्यार्थियों के लिए ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां वे मानसिक और भावनात्मक परेशानियों को खुलकर साझा कर सकें और समय रहते सहायता प्राप्त कर सकें।

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