रोहतक में बाँड पॉलिसी के विरोध में चल रहे धरने पर मंगलवार को प्रदेश के चारों मेडिकल कॉलेज से MBBS स्टूडेंट पहुंचे। उन्होंने बाँड पॉलिसी के विरोध में अपना रोष जताया और मांग की कि जल्द से जल्द इस पॉलिसी को वापस लिया जाए। वहीं मुख्यमंत्री के बयान चिकित्सक मेवा खाते हैं सेवा नहीं करते, पर भी पलटवार करा और कहा कि चिकित्सक सेवा ही करते हैं।

वहीं कोरोना काल में सरकार द्वारा चिकित्सकों के सम्मान में फूल बरसाए थे। आज चिकित्सकों ने बाँड पॉलिसी के विरोध में सरकार को वे फूल भी वापस कर दिए। साथ ही कहा कि एक तरफ सरकार चिकित्सकों के सम्मान का ढ़ोंग कर रही है, वहीं भावी चिकित्सकों पर 40 लाख का आर्थिक बोझ डालकर उसे मानसिक रूप से परेशान कर रही है।

रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन व MBBS स्टूडेंट ने सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया। साथ ही कहा कि सरकार 72 घंटे में इस बाँड की शर्त को खत्म नहीं करती है तो MBBS स्टूडेंट अपने आंदोलन को और अधिक बड़े स्तर पर चलाएंगे। उन्हें चंडीगढ़ जाना पड़ा तो भी पीछे नहीं हटेंगे। साथ ही रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने भी मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल की चेतावनी दी।

रोहतक PGI में पिछले एक पखवाड़े से MBBS स्टूडेंट का धरना चल रहा है। इस धरने पर मंगलवार को IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) पहुंची। IMA ने सभी स्टूडेंट्स को सर्मथन दिया और मांग की कि जल्द से जल्द बाँड पॉलिसी वापस की जाए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो IMA भी छात्रों के साथ प्रदर्शन करेगी।

मंगलवार को प्रदेश के सभी चारों सरकारी मेडिकल कॉलेज के MBBS छात्र रोहतक PGI में एकत्रित हुए। जहां पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल, बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज सोनीपत व शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज नूंह के छात्रों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया।

MBBS स्टूडेंट ने कहा कि सरकार 40 लाख की बाँड पॉलिसी लेकर आई है, जो विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी होने से पहले ही कर्जवान बना देगी। अगर कोई विद्यार्थी बैंक के माध्यम से बाँड पॉलिसी लेकर पढ़ाई करता है तो उसकी पढ़ाई पूरी होने के बाद भी उसे 60 हजार रुपए प्रति माह तक की किस्त भरनी होंगी। ऐसे में वे बाँड की किस्त भरेंगे या नौकरी करेंगे।

मेडिकल स्टूडेंट ने कहा कि सरकार ने बाँड पॉलिसी की अवधि 7 साल की है, लेकिन सरकार के पास पढ़ाई पूरी करने वाले सभी चिकित्सकों के लिए काम तक नहीं हैं। MBBS की पढ़ाई पास कर चुके विद्यार्थियों को सालों नौकरी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सरकार बाँड पॉलिसी के अवधि कम करे और नौकरी की गारंटी भी दी।

ये रखी मांग

– बाँड एग्रीमेंट में से बैंक की दखल अंदाजी पूरी तरह से खत्म की जाए।

– साथ ही बाँड सेवा की अवधि 7 साल से घटाकर अधिकतम 1 वर्ष की जाए।

– ग्रेजुएशन के अधिकतम 2 महीने के अंदर सरकार MBBS ग्रेजुएट को नौकरी प्रदान करे।

– 40 लाख सेवा बाँड राशि को घटाकर 5 लाख रुपए किया जाए।

– PG कोर्स (MD/MS) के बारे में स्थिति बिल्कुल साफ की जाए।

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