रोहतक के पीजीआई में मंकीपाक्‍स को लेकर अब अलर्ट जारी होने लगा है। देश में भी इसकी एंट्री हो चुकी है। हरियाणा में हालात कोरोना की तरह न हो इसे लेकर तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। इसी कड़ी में रोहतक के पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में स्वर्ण जयंती सभागार में कुलपति डा. अनिता सक्सेना की अध्यक्षता में मंकीपाक्स वायरस को लेकर एक मिटिंग का आयोजन किया गया। मीटिंग में डा. अनिता सक्सेना ने मंकीपाक्स से निपटने से संबंधित जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए।

चिकित्सा अधीक्षक डा. ईश्वर सिंह ने बताया कि कुलपति डा. अनिता सक्सेना ने मंकीपाक्स के मरीजों के लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाने के आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं चर्म रोग विभागाध्यक्ष को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि माइक्रोबायोलोजी विभाग, मेडिसन, शिशु रोग एवं कम्युनिटी मेडिसन विभाग के चिकित्सकों की टीम बनाई गई है। उन्होंने बताया कि यदि कोई मंकीपाक्स का मरीज आता है तो उसका सैंपल कैसे लिया जाए, इसके लिए ट्रेनिंग प्रदान की जाएगी और रिकोर्ड कोविड कंट्रोल रूम में रखा जाएगा।

डा. अर्पणा परमार ने बताया कि मंकीपाक्स एक डीएनए वायरस है। यह अलग-अलग स्टेज में फैलता है। उन्होंने बताया कि इसका पांच से 21 दिन का इंक्युबेशन पीरियड होता है। डा. अर्पणा ने बताया कि एक से पांच दिन बुखार आता है, रेसिज चिक्रपाक्स जैसे निशान (माता आना) होते हैं और गले में गलैंड बढ़ जाते हैं।

उन्होंने बताया कि रेशेज पर पपड़ी करीब दो से चार सप्ताह तक रहती है और तब तक मरीज को आइसोलेशन में रखा जाता है। उन्होंने कहा कि यह किसी मरीज के नजदीकी संपर्क में आने से, कपड़े व चमड़ी को छूने से फैलता है। उन्होंने बताया कि अभी इसकी जांच पुणे लैब में की जा रही है और अभी इसके तीन मरीज केरल व एक मरीज दिल्ली में मिला है।

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