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रोहतक MDU ने विवाद का ठीकरा 3 छात्र नेताओं पर फोड़ा:कहा-निजी स्वार्थ के लिए महिला कर्मियों को भड़काया; पीरियड्स की पुष्टि के लिए कपड़े उतरवाए थे

महिला कर्मियों के पीरियड्स की पुष्टि के लिए कपड़े उतरवा फोटो खींचने के विवाद में रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) ने राज्य महिला आयोग के नोटिस का जवाब दे दिया है। यूनिवर्सिटी के सामान्य प्रशासन के प्रोफेसर इंचार्ज एवं संपदा निदेशक भगत सिंह की ओर से 3 पेज का जवाब सबमिट किया गया है। इसमें पूरा ठीकरा 3 छात्र नेताओं पर फोड़ दिया है।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपने जवाब में तीनों छात्र नेताओं के नाम का भी जिक्र किया है। इनमें विक्रम डूमोलिया, प्रदीप मोटा और हिमांशु कांगड़ा शामिल हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दावा किया कि इन छात्र नेताओं ने ही निजी स्वार्थ के लिए महिला सफाई कर्मियों को भड़काया।

राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने 29 अक्टूबर को इस मामले में एमडीयू के कुलपति और रोहतक एसपी को लेटर जारी कर 5 दिन में मामले से जुड़ी पूरी रिपोर्ट और क्या एक्शन लिया गया, इसकी रिपोर्ट मांगी थी। MDU ने तेजी दिखाते हुए एक ही दिन में रिपोर्ट सबमिट कर दी।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आगे महिला कर्मचारियों के आरोप का भी जिक्र किया। लिखा- महिलाओं ने बताया कि सुपरवाइजर विनोद हुड्डा और वितेंद्र ने उनके साथ बदसलूकी की है। जब हम सड़क पर सफाई कर रही थी, तो वितेंद्र व विनोद को बताया कि हम मासिक धर्म से पीड़ित हैं। ऐसे कहने पर दोनों ने हमसे कहा कि गवर्नर साहब का दौरा है, सफाई करवाना बहुत जरूरी है।

पीड़ित महिलाओं के हवाले से आगे कहा- सुपरवाइजरों ने हमें कहा काम में लगे रहो। तुम्हें कोई बीमारी नहीं है और तुम काम से बचने को बहाने बना रही हो। उसके बाद चिल्लाकर कहा कि तुम अपनी चेकिंग करवाओ। सुपरवाइजरों ने कहा-हमें असिस्टेंट रजिस्ट्रार (जनरल ब्रांच) ने निर्देश दिए हैं।

प्रो. भगत सिंह ने जवाब में आगे लिखा- महिला सफाई कर्मियों की सारी बात सुनने के बाद आश्वासन दिया कि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होगी और कार्यमुक्त किया जाएगा। मामले की उचित जांच के लिए लिखित में शिकायत देने को कहा। बार-बार कहने के बावजूद 26 अक्टूबर को महिलाओं की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई।

सफाई कर्मियों द्वारा बार-बार मांग करने पर उन्होंने कुलसचिव को घटनास्थल पर आने का आग्रह किया। कुलसचिव मौके पर पहुंचे। इसी बीच सहायक कुलसचिव श्याम सुंदर व सुपरवाइजर वितेंद्र भी पहुंच गए। सहायक कुलसचिव श्याम सुंदर ने सफाई कर्मचारियों के सामने कहा कि उन्होंने किसी भी महिला सफाई कर्मी के लिए किसी भी प्रकाश की अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया। न ही महिलाओं के कपड़े चेक करने के निर्देश दिए थे। कुलसचिव के कहने पर भी महिला कर्मियों ने लिखित शिकायत नहीं दी।

जवाब में कहा- यूनिवर्सिटी के सिक्योरिटी इंचार्ज, कुलसचिव, प्रॉक्टर व जनरल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रोफेसर इंचार्ज फिर सभी कर्मियों से मिले। कुलसचिव ने दोबारा दोहराया कि हमें लिखित शिकायत दें, जिससे आरोपियों के खिलाफ जल्दी से जल्दी नियमानुसार कार्रवाई हो सके। उसके बाद महिला कर्मियों ने शिकायत की कॉपी कुलसचिव को दी।

प्रोफेसर इंचार्ज का दावा है-कुलसचिव ने लिखित शिकायत की कॉपी तुरंत कुलपति को प्रस्तुत की। कुलपति ने दोनों सुपरवाइजरों विनोद हुड्डा व वितेंद्र को 27 अक्टूबर को ही निलंबित कर दिया। उसी दिन यह मामला यूनिवर्सिटी की आंतरिक शिकायत कमेटी को भेजा। 28 अक्टूबर कुलसचिव महिला सफाई कर्मियों की शिकायत तुरंत पुलिस को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी।

पूरा मामला 👇

हरियाणा के रोहतक में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) में 4 महिला कर्मचारियों से पीरियड्स का सबूत मांगा गया। इतना ही नहीं, उनके कपड़े उतरवाकर सैनिटरी पैड की फोटो भी खिंचवाकर देखी गई। हंगामा होने के बाद आरोपी सुपरवाइजर को सस्पेंड कर दिया गया है।

घटना 26 अक्टूबर की है। मामला तब सामने आया, जब महिलाओं ने घटना के फोटो-वीडियो हरियाणा महिला आयोग को भेजे। आयोग ने बुधवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन से सुपरवाइजर को बर्खास्त करने को कहा है।

सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन कृष्ण कुमार और रोहतक मेयर राम अवतार वाल्मीकि ने पीड़ित महिलाओं से बातचीत की है। इस दौरान महिलाओं ने उन्हें आपबीती सुनाई।

आयोग के सामने पीड़ित महिलाओं ने बताया कि सुपरवाइजर ने एक अन्य महिला कर्मचारी की मदद से उनके अंतर्वस्त्र और सैनिटरी पैड की जांच करवाई थी कि खून के धब्बे लगे हैं या नहीं। पुष्टि के लिए पैड की फोटो भी खींची गई।

इस मामले में हरियाणा राज्य महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने रोहतक के एसपी और एमडीयू कुलपति को लेटर लिखकर 5 दिन में जवाब मांगा है।

लेटर में लिखा- यह अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग अधिनियम 2012 के नियम 10(1) के तहत निर्देश देता है कि तुरंत कार्रवाई करते हुए मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट आयोग को 5 दिन के अंदर भेजी जाए।

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