रोहतक की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Additional Sessions Judge) की अदालत ने वर्ष 2020 में दर्ज एक रेप एवं पोक्सो मामले में सभी सात आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। मामले में आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिषेक चौधरी ने बताया कि सांपला थाना में 1 अक्टूबर 2020 को प्रारंभ में छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराया गया था, जिसे बाद में रेप के आरोपों में परिवर्तित कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में दो सगे भाइयों सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया था।
बचाव पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता के बेटे और एक आरोपी के बीच पूर्व विवाद था, जिसके चलते रंजिशवश झूठा मामला दर्ज कराया गया। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि शिकायत पक्ष द्वारा प्रस्तुत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में गंभीर खामियां थीं तथा मेडिकल जांच में हुई देरी और अन्य तथ्यों ने भी अभियोजन के मामले पर सवाल खड़े किए।
अधिवक्ता अभिषेक चौधरी के अनुसार इस मामले में कुल 32 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से 26 की गवाही दर्ज हुई। लगभग छह वर्ष तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। सभी साक्ष्यों और गवाहियों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने सबूतों के अभाव में सातों आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया
