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सावन कृपाल रूहानी मिशन की रोहतक शाखा ने किया बाल आध्यात्मिक शिविर का आयोजन

सावन कृपाल रूहानी मिशन की गोहना रोड़ पर स्थित रोहतक शाखा कृपाल आश्रम की ओर से 5 मई, 2024 को एक दिवसीय बाल आध्यात्मिक शिविर का आयोजन किया गया, जिसका विषय था, ’2024 में ज्यादा से ज्यादा ध्यान-अभ्यास करें‘। बच्चों के लिए लगाए गए इस बाल आध्यात्मिक शिविर में 5 साल से लेकर 16 साल तक प्रदेश भर से आएं सैकड़ों बच्चों ने बड़े ही उत्साह से भाग लिया।


इस बाल आध्यात्मिक शिविर में बच्चों को ध्यान-अभ्यास की विधि सिखाकर उन्हें प्रतिदिन ज्यादा से ज्यादा समय ध्यान-अभ्यास पर बैठने की प्रेरणा दी गई क्योंकि इसके द्वारा वे अपने जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवसर पर बच्चों के लिए आत्म-निरीक्षण डायरी, स्वस्थ जीवन शैली, शाकाहारी भोजन, सूफी कव्वाली व संगीत, कविता पाठ और चित्रकला जैसे विषयों पर अनेक प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं,

जिसमें बच्चों ने बड़ी ही खुशी से भाग लेकर अपनी योग्यता व प्रतिभा का परिचय दिया। चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों के चित्रों को देखकर ऐसा लगता था, मानो उन्होंने अपने हृदय के विचारों को रंगों में ढालकर परमात्मा से संबंध स्थापित करने की एक छोटी सी कोशिश की हो।

शिविर में भाग लेने वाले बच्चों के माता-पिताओं को ये जानकारी भी दी गई

कि वे अपने बच्चों को प्रत्येक रविवार प्रातः 10ः30 से 11ः30 बजे कृपाल आश्रम में आयोजित बाल सत्संग में ज़रूर भेंजे। सभी माता-पिताओं ने सावन कृपाल रूहानी मिशन द्वारा आयोजित इस बाल आध्यात्मिक शिविर की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन शिविरों के द्वारा बच्चों में नैतिक गुणों का विकास होता है, जिससे कि एक स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है।

सावन कृपाल रूहानी मिशन के अध्यक्ष संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के मार्गदर्शन में बच्चों के आध्यात्मिक विकास के लिए ‘बाल सत्संग’ की स्थापना की गई है, जिसमें उन्हें अध्यात्म के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ नैतिक जीवन जीने की शिक्षा दी जाती है ताकि वे शुरू से ही अपने जीवन में सद्गुणों को ढाल सकें और शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक स्तर पर भी सफलता प्राप्त कर सकें।

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के सान्निध्य में बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास के लिए मिशन द्वारा भारतवर्ष में 23 दर्शन एकेडमी स्कूल और कोलंबिया में भी एक दर्शन एकेडमी स्कूल की स्थापना की गई है, जिसमें बच्चों के चहुंमुखी विकास पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है। इन सभी स्कूलों में आध्यात्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम का एक महत्त्वपूर्ण अंग है, जिसमें बच्चों को स्कूलों में प्रतिदिन ध्यान-अभ्यास की बैठक पर बिठाया जाता है।

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