वार्ड नंबर 2 स्थित बरसी नगर कॉलोनी में लंबे समय से सीवर ओवरफ्लो और बदहाल सड़क की समस्या से जूझ रहे निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। शनिवार को कॉलोनीवासियों ने मौके पर एकत्रित होकर नगर निगम, मार्केटिंग बोर्ड और जनस्वास्थ्य (पब्लिक हेल्थ) विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ कड़ा रोष जताया और मीडिया के सामने अपनी समस्याएं रखीं।
विभागीय तालमेल की कमी से अधर में लटका काम
सामाजिक कार्यकर्ता राकेश भारद्वाज ने बताया कि यह मार्ग टिटौली, सुंदरपुर सहित करीब 8 गांवों को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता है। दिसंबर 2024 में कॉलोनी को अप्रूवल मिलने के बावजूद आज तक मूलभूत सुविधाएं नहीं दी गईं। उन्होंने कहा:
क्षमता से अधिक दबाव: आबादी बढ़ने के कारण दशकों पुरानी सीवर लाइन लोड नहीं ले पा रही है, जिससे सीवर का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है।
विभागों की खींचतान: सड़क निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। मार्केटिंग बोर्ड इसे निगम का क्षेत्र बताता है, जबकि नगर निगम मार्केटिंग बोर्ड की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहा है।
सड़क निर्माण पर संशय: सड़क का टेंडर हो चुका है और फाइल मुख्य अभियंता तक पहुंच गई है, लेकिन पब्लिक हेल्थ विभाग का कहना है कि पहले सीवर लाइन दुरुस्त की जाए, ताकि नव-निर्मित तारकोल की सड़क दोबारा जलभराव से बर्बाद न हो।
पार्षद प्रतिनिधि का बयान: 1 तारीख के बाद शुरू होगा कार्य
मौके पर पहुंचे वार्ड नंबर 2 के पार्षद प्रतिनिधि ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सड़क का टेंडर प्रक्रियाधीन है और 1 तारीख के बाद धरातल पर काम शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा:
हाउस मीटिंग में सीवर लाइन बदलने के संबंध में लिखित आवेदन दिया जा चुका है।
पब्लिक हेल्थ विभाग की लापरवाही और अमृत योजना व ठेकेदारों द्वारा जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के कारण सफाई व्यवस्था ठप पड़ी है।
मेयर के समक्ष यह मामला उठाया जा चुका है और आगामी बैठक में इसे प्रमुखता से रखकर लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों की जवाबदेही तय कराई जाएगी।
मांगें और आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम महापौर वाल्मीकि, एसई (SE) और एक्सईएन (XEN) से मांग की है कि:
सड़क निर्माण से पूर्व तुरंत नया एस्टीमेट पास करवाकर नई सीवर लाइन डाली जाए।
60 फीट चौड़े रास्ते पर 18 फीट का रोड बनने के बाद दोनों तरफ खाली बची जगह पर निगम द्वारा पेवर ब्लॉक लगाए जाएं।
कॉलोनीवासियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ और कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो वे जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय का घेराव करने को मजबूर होंगे।
