पानीपत में हरि नगर कॉलोनी से जनवरी माह में संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए दो नाबालिग सगे भाइयों का तीन माह बाद भी कोई सुराग नहीं लगा है। मां-बाप दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। गली-गली में इश्तिहार लगा रहे हैं।
फोटो दिखाकर लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। मगर, पुलिस उनकी कोई मदद नहीं कर रही है। इन तीन महीनों में एक बार मां-बाप के पास एक कॉल भी आई थी। जिसने कहा था कि बच्चे उसे बेचे गए हैं। उसे 4 लाख रुपए चाहिए, वह उन्हें छोड़ देगा। पुलिस ने इस कॉल को भी फेक साबित किया था।
हरिनगर कॉलोनी के रहने वाले दिलीप ने बताया कि 25 साल से वह पानीपत में परिवार के साथ रह रहा है। उसके दो बेटे 10वीं कक्षा का छात्र विशाल(17) और 8वीं कक्षा का छात्र आदित्य(15) जनवरी माह से लापता हैं। पुलिस को शिकायत देने के बाद भी बच्चों का आज तक कोई सुराग नहीं लगा।
कई बार वे बड़े अधिकारियों के पास भी पहुंचे, पर उनको फटकार लगाकर वहां से भगा दिया। सरकारी बाबुओं से बार-बार मिलने के बाद दर-दर की ठोकरें खाने के बाद अब यह दंपती अपने बच्चों को ढूंढने के लिए खुद निकला है।
दंपति का कहना है कि वह प्रशासन से त्रस्त हो चुका है और उनके बच्चे पता नहीं किस हालत में होंगे। इसलिए वह खुद ही इन्हें ढूंढ रहे हैं। पुलिस प्रशासन की तरफ से उनकी कोई मदद नहीं की गई, बल्कि यह कहकर उन्हें थाने से भगा दिया गया कि जब तुम्हारे बच्चे मिल जाए तो हमें बता देना।
एक महीना बीत जाने के बाद उनके पास एक कॉल आई है। कॉल करने वाले शख्स ने खुद को डॉक्टर बताया और कहा कि उसने इन दो बच्चों को 3 लाख में खरीदा है। वे अंग तस्करी का काम करते हैं। अंग निकालने से पहले बच्चे रो रहे थे, तो उन्होंने आपका नंबर दिया।
हमने बच्चों को 3 लाख में खरीदा है, आप 4 लाख दें तो हम आपके बच्चों को छोड़ देंगे। मजबूर पिता रुपए देने के लिए भी तैयार हो गया। उसके बाद वह शिकायत लेकर फिर थाने में पहुंचा। थाने से उनकी शिकायत CIA टीम को ट्रांसफर कर दी गई लेकिन टीम ने 3 दिन बाद कहा यह कोई बोगस कॉल थी।

