सिरसा। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
अंशुल छत्रपति की ओर से दायर स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने सुनवाई की। अंशुल ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें 7 मार्च 2026 को गुरमीत राम रहीम को रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बरी कर दिया गया था।
अंशुल छत्रपति का आरोप है कि सीबीआई की जांच में गुरमीत राम रहीम को इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता माना गया था। उनके मुताबिक, लाइसेंसी रिवॉल्वर, वॉकी-टॉकी सेट और अन्य साक्ष्य व गवाहों के आधार पर सीबीआई ने जांच आगे बढ़ाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इन पहलुओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
अंशुल ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई की जाए और सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा जाए।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 7 मार्च 2026 को रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया था। हालांकि कोर्ट ने मामले में तीन अन्य आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की सजा बरकरार रखी थी।
इससे पहले पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले में राम रहीम समेत आरोपियों को दोषी ठहराया था। हाईकोर्ट ने राम रहीम को बरी करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ हत्याकांड में साजिशकर्ता होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं।अब हाईकोर्ट के इसी फैसले को अंशुल छत्रपति ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामले की आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी।
