नई दिल्ली: पेट्रोल में एथेनॉल की निर्धारित 20 प्रतिशत सीमा से ज्यादा मात्रा मिलने के आरोपों को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, ‘E20 अब 420 बन गया है, जनता की गाड़ी से पेट्रोल चोरी हो रहा है।’
राहुल गांधी के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने राज्य के 7 जिलों से पेट्रोल के 14 सैंपल लेकर मान्यता प्राप्त लैब में जांच कराई। इनमें से 11 सैंपलों में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल के एक सैंपल में 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के एक सैंपल में 30.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलने का दावा किया गया है।
हालांकि, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने जांच के नतीजों पर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का कहना है कि सैंपल लेने और जांच करने की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी व तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं थी।
राहुल गांधी ने उठाए तीन सवाल
राहुल गांधी ने ज्यादा एथेनॉल मिले पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानी का मुद्दा उठाया। उनके अनुसार, निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल वाला पेट्रोल इस्तेमाल करने से कुछ वाहनों का माइलेज कम हो सकता है और रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि आम लोग पेट्रोल की पूरी कीमत चुका रहे हैं, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही कि उनकी गाड़ी में कितनी मात्रा में एथेनॉल मिला ईंधन डाला जा रहा है। इससे ग्राहकों के पास अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प भी सीमित हो जाता है।
राहुल गांधी ने देशभर में बिक रहे पेट्रोल में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा सार्वजनिक करने और तय सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने की पुष्टि होने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कर्नाटक की जांच में अलग-अलग कंपनियों के सैंपल में मिले ये आंकड़े
कर्नाटक सरकार की ओर से कराई गई जांच के हवाले से सामने आए आंकड़ों में कई कंपनियों के पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलने का दावा किया गया है।
| कंपनी/पेट्रोल का प्रकार | जांच में बताई गई एथेनॉल मात्रा |
|---|---|
| IOCL | 31.2% तक |
| HPCL पावर पेट्रोल | 30.5% |
| HPCL सामान्य पेट्रोल | 27% |
| BPCL स्पीड पेट्रोल | 26.5% |
| BPCL के अन्य सैंपल | 24.2% और 22.6% |
| नायरा | 26.1% |
| शेल | 25.5% |
| MRPL | 19.2% |
ये आंकड़े कर्नाटक में लिए गए सैंपलों की जांच से जुड़े दावे हैं। तेल कंपनियों ने जांच प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है और रिपोर्ट की दोबारा जांच कराने की मांग की है।
तेल कंपनियों ने कहा- E20 पेट्रोल BIS मानकों के अनुरूप
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने संयुक्त रूप से कहा कि कर्नाटक समेत देशभर में सप्लाई किया जा रहा E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के निर्धारित मानक IS 17021 के अनुरूप है।
कंपनियों ने अक्टूबर में लिए गए सैंपलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेट्रोल के नमूने लेने, उन्हें सुरक्षित रखने, लैब में भेजने और जांच रिपोर्ट जारी करने के लिए स्पष्ट नियम हैं। इनका पालन होना जरूरी है।
सैंपल जांच की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
तेल कंपनियों के अनुसार, नियमों के तहत पेट्रोल के एक-एक लीटर के 6 सैंपल लिए जाते हैं। इनमें से 2 सैंपल पेट्रोल पंप संचालक को रसीद देकर दिए जाते हैं, 2 संबंधित तेल कंपनी या विभाग के पास रखे जाते हैं और बाकी 2 जांच के लिए निर्धारित लैब में भेजे जाते हैं।
कंपनियों का कहना है कि सैंपल के लेबल पर संबंधित पक्षों के हस्ताक्षर होने चाहिए। साथ ही जांच रिपोर्ट निर्धारित समय में पेट्रोल पंप संचालक और तेल कंपनी को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
तीनों कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से सैंपल लेने की प्रक्रिया के दस्तावेज, प्रत्येक पेट्रोल पंप की जांच रिपोर्ट और जांच के तरीके की जानकारी मांगी है। उन्होंने सैंपलों की दोबारा जांच अधिकृत लैब में कराने और इस प्रक्रिया में राज्य सरकार व तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की है।
माइलेज और मेंटेनेंस से सालाना हजारों करोड़ के नुकसान का अनुमान
कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
कर्नाटक सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, यदि पेट्रोल में अधिक एथेनॉल के कारण वाहनों के माइलेज में 10 प्रतिशत की गिरावट आती है, तो देशभर के वाहन मालिकों को सालाना करीब 62 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा इंजन की खराबी और बार-बार सर्विसिंग की वजह से करीब 39 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान जताया गया है।
हालांकि, ये आंकड़े संभावित नुकसान के अनुमान हैं। इनका वास्तविक प्रभाव वाहनों के प्रकार, ईंधन की गुणवत्ता और उपयोग की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल इस मामले में कर्नाटक सरकार की जांच रिपोर्ट और तेल कंपनियों की आपत्तियों के बीच विवाद बना हुआ है। दोबारा जांच और आधिकारिक रिपोर्ट से ही एथेनॉल की वास्तविक मात्रा तथा जांच प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
