रोहतक: नगर निगम रोहतक में विकास कार्यों के टेंडर को लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। शहर में नाला निर्माण और पार्कों की मेंटेनेंस से संबंधित कार्यों के टेंडर वार्डवार अलग-अलग लगाने की मांग को लेकर कई पार्षदों ने मेयर रामअवतार वाल्मीकि को सामूहिक पत्र सौंपा है। पार्षदों ने मौजूदा टेंडर प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने और दोनों प्रकार के कार्यों के लिए अलग-अलग टेंडर जारी करने का अनुरोध किया है।

एक साथ टेंडर लगाने से गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका

पार्षदों ने अपने पत्र में कहा है कि नगर निगम क्षेत्र में नाला निर्माण और पार्कों की मेंटेनेंस से संबंधित कार्यों के टेंडर पूरे शहर के लिए एक साथ लगाए गए हैं। उनके अनुसार, एक ही टेंडर में पूरे शहर के विभिन्न वार्डों के कार्य शामिल होने से कामों की संख्या और कार्यक्षेत्र काफी बढ़ जाता है। इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने और निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा करने में देरी होने की आशंका है।

वार्ड स्तर पर निगरानी में आ सकती है परेशानी

पत्र में पार्षदों ने यह भी उल्लेख किया है कि जब पूरे शहर के कार्य एक ही टेंडर के अंतर्गत कराए जाते हैं, तो वार्ड स्तर पर कार्यों की प्रभावी निगरानी करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, संबंधित पार्षदों और अधिकारियों के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित करने में भी परेशानी आने की आशंका जताई गई है।

पार्षदों का कहना है कि यदि प्रत्येक वार्ड के कार्यों के लिए अलग-अलग टेंडर लगाए जाते हैं, तो संबंधित पार्षद अपने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की बेहतर निगरानी कर सकेंगे। इससे काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा करवाने में भी मदद मिल सकती है।

टेंडर रद्द कर वार्डवार जारी करने की मांग

मेयर को सौंपे गए पत्र में पार्षदों ने अनुरोध किया है कि नाला निर्माण और पार्कों की मेंटेनेंस से संबंधित मौजूदा टेंडर को रद्द करने या उस पर पुनर्विचार करने के बाद वार्डवार अलग-अलग टेंडर लगाए जाएं। उन्होंने जनहित और शहर के विकास कार्यों की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए इस मामले में उचित कार्रवाई करने की अपील की है।

इस पत्र पर नगर निगम के कई पार्षदों के हस्ताक्षर दिखाई दे रहे हैं। पत्र का उद्देश्य विकास कार्यों की निगरानी को प्रभावी बनाना और वार्ड स्तर पर कामों को बेहतर तरीके से पूरा करवाना बताया गया है।

फिलहाल, इस पत्र के आधार पर टेंडर रद्द होने की पुष्टि नहीं होती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम प्रशासन और मेयर की ओर से पार्षदों की इस मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है और आगामी समय में टेंडर प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।

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