ऑनलाइन गेम कितना खतरनाक है, राजस्थान से सामने आई इस खबर से साफ पता चलता है। ऑनलाइन गेम की लत से बच्चे का मानसिक संतुलन बिगड़ने के साथ-साथ आंख भी खराब हो गई।
पीड़ित बच्चे की उम्र महज 15 वर्ष है। गेम खेलते-खेलते उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने के साथ-साथ आंख भी खराब हो गई। पीड़ित बच्चे के पिता ने बताया कि लगभग 6 से 7 महीने पहले बच्चा लगातार पबजी खेल रहा था। जब भी घर का फोन खाली मिलता वो पबजी खेलने लगता। इस बीच बच्चे को गेम की गंदी लत लग गई। जब घरवाले गेम खेलने के लिए मना करते तो मोहल्ले में चला जाता, या फिर रजाई के अंदर गेम खेलता था। इस दौरान बच्चा पबजी गेम के जकड़ में आ गया।
बच्चे के पिता ने बताया कि पहले तो 4 से 5 घंटे गेम खेलता था। लेकिन धीरे-धीरे हर वक्त केवल गेम ही खेलने लगा था। पिता के अनुसार बच्चा 24 घंटे में 10 से 12 घंटे केवल गेम ही खेलता था। पिता ने बताया कि धीरे-धीरे इसका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा। उससे मोबाइल लेने की कोशिश करते तो वो चिड़िचिड़ाने लगता और गुस्सा करने लगाता था।
पीड़ित बच्चे के पिता ने बताया कि कुछ दिन बाद उसकी आंखों में भी बदलाव हुआ। इसके बाद डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि वो पबजी का शिकार है। उसे अब घर में बांध कर रखना पड़ता है, लेकिन मौका मिलते ही घर से भाग जाता है। पिता ने बताया कि बच्चा घर से दो बार रेवाड़ी व एक बार बानसूर भाग चुका है।
पिता ने बताया कि धीरे-धीरे हालत इतनी खराब होती जा रही कि उसकी उंगलियां और शरीर का कोई भी अंग अपने आप हिलने लगता है। उसकी खराब हालत के बाद उसे 15 दिनों के लिए स्पेशल चाइल्ड केयर हॉस्टल में रखा। जहां देखभाल और दवाई के बाद थोड़ा हालत में सुधार हुआ है। बच्चे की हालत से पूरा घर परेशान है। पिता एक ऑटो चालक हैं और मां घर में झाड़ू पोछा लगाती हैं।
बच्चे का इलाज कर रहे मनोचिकित्सक डॉ. जेएस शर्मा ने बताया कि मेरे पास भी ऐसा ही एक केस आया था। इसकी मां ने ही स्मार्टफोन दिया था और ये सोचकर कि बच्चा उन्हें परेशान नहीं करेगा। लेकिन, बच्चा ऑनलाइन गेम की लत का शिकार हो गया। उसे होश ही नहीं रहता था कि कब दिन हुआ है और रात हुई है। और, ये इस वजह से हुआ क्योंकि उसका फोकस एक ही जगह यानी गेम में होने लगा। हमारा माइंड अपर, मिड और लोअर तीन हिस्सों में काम करता है। ऐसे में उसे पता ही नहीं चलता कि वह कर क्या रहा है। शरीर का न्यूरोसिस्टम प्रभावित होने से हाथ-पैर कांपने लगते हैं। ये सब इसी गेम की वजह से हुआ है। एक्सपर्ट ने बताया कि इसके लिए सबसे जरूरी है कि अपने बच्चों में मोबाइल का एडिक्शन न होने दें। ऐसा ही केस एक ब्लू व्हेल गेम की वजह से आया था। जब काउंसलिंग की तो पता चला कि वह सुसाइड करने वाला था। जैसे-तैसे उसे बाहर इस गेम से बाहर निकाला। पबजी और फ्री फायर जैसे गेम पूरे दिमाग के सिस्टम को खराब कर देते हैं।

