Site icon Digital Bhoomi – Haryana's Leading News Plate form and Weekly Newspaper Get latest Haryana News

दर्जनों गांवों में प्रदर्शन: मनरेगा बहाली और वीबी ग्रामजी रद्द करने की मांग


प्रैस नोट जारी करते हुए खेत मजदूर यूनियन के राज्य कमेटी सदस्य रामचन्द्र बैंसी ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नरेगा संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर खरक, बैंसी, खरैंटी, लाखन माजरा, घडौठी, चांदी आदि गांवों में मज़दूरों ने वी बी ग्राम जी अधिनियम को विरोध कर प्रतियां जलाई गई।
अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रेमचंद ने मजदूरों को संबोधित करते कहा कि वी बी ग्राम जी की नई योजना ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर कुठाराघात साबित हो रहा है। मनरेगा में केंद्र सरकार द्वारा 100% मजदूरी का खर्च उठाया जाता था। वहीं, ‘वी बी ग्राम जी’ में 60:40 का फंडिंग मॉडल (60% केंद्र और 40% राज्य का) लागू किया जाएगा । हरियाणा जैसे राज्य पर इसका अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा, जिससे बजटीय कमी के कारण काम के दिन घटेंगे । काम का ‘कानूनी अधिकार’ खत्म होगा । मनरेगा रोजगार की मांग करने का एक सीधा कानूनी अधिकार देता है । ‘वी बी ग्राम जी’ को बजट और निश्चित लक्ष्यों से जोड़ दिया गया है, जिससे काम की गारंटी बजट आवंटन पर निर्भर हो जाती है। तकनीकी बाधाओं से कार्य में बहुत ज्यादा दिक्कत आएंगी । इस नई प्रणाली में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अनिवार्य उपयोग किया जाएगा जिससे बहुत ज्यादा समस्याएं खड़ी होंगी । हरियाणा के ग्रामीण इलाकों के ज्यादातर अकुशल मजदूरों के लिए इस तकनीकी प्रक्रिया को समझना और पूरा करना एक बड़ी बाधा बनेगा । वी बी ग्राम जी लागू होने से मजदूरों की आजीविका सुरक्षा कमजोर होगी ।
राज्य सचिव मंडल सदस्य संदीप सिंह ने डोभ व लाहली गांव में महिला मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा न केवल भारत के संविधान के “नीति निर्देशक तत्वों” में निर्धारित रोजगार के अधिकार को पूरा करता था, बल्कि ग्रामीण गरीबों की आजीविका के आधार को मजबूत करने के लिए ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण भी करता था। मनरेगा की जगह लेने वाला नया अधिनियम कानूनी रोजगार की गारंटी को “केंद्र सरकार की योजना” में परिवर्तित कर देता है जो बिल्कुल भी रोजगार की गारंटी नहीं देती है। वी बी ग्राम जी के लागू होने से बहुत सारी चिंताएं खड़ी होती हैं। उदाहरणतः पहला, धारा 4(5) मनरेगा के तहत वैधानिक रोजगार गारंटी को आवंटन-आधारित, केंद्र प्रायोजित “योजना” में बदल देती है और केंद्र सरकार को वार्षिक रूप से राज्य वार आवंटन निर्धारित करने का अधिकार देती है। दूसरा, जो राज्य अधिक व्यापक रोजगार गारंटी प्रदान करने के लिए अपने स्वयं के संसाधनों और केंद्रीय आवंटन को एक साथ जोड़ना चाहते हैं, वे केंद्र द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार ही ऐसा कर सकते हैं (नए कानून की धारा 4(6) और 22(5) के अनुसार), जो राजकोषीय स्वायत्तता को सीमित करता है। तीसरा, धारा 5(1) केंद्र को उन ग्रामीण क्षेत्रों को अधिसूचित करने के लिए अधिकृत करती है जहां गारंटी लागू होती है और यह प्रभावी रूप से उस सार्वभौमिक पात्रता को समाप्त कर देता है जो मनरेगा की विशेषता बन गई थी। चौथा, धारा 22(2) व्यय के राज्य हिस्से को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर देती है । पांचवां, धारा 22(4) मनरेगा के “ओपन-एंडेड” वित्तपोषण ढांचे को केंद्र द्वारा निर्धारित राज्य-वार “मानक आवंटन” से बदल देती है। जो कि अधिकार – आधारित, मांग-संचालित पात्रता को आपूर्ति-बाधित, आवंटन-आधारित कार्यक्रम में बदल देता है, जो अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं के समान है। छठा, नया कानून स्थानीय मांग के आधार पर साल भर रोजगार प्रदान करने के प्रावधान को समाप्त कर देता है। धारा 6(1) और 6(2) मुख्य कृषि मौसमों के दौरान 60 दिनों के लिए काम के प्रावधान को प्रतिबंधित करती हैं, जो जाहिर तौर पर बुवाई और कटाई कार्यों के लिए “कृषि श्रम की पर्याप्त उपलब्धता को सुविधाजनक बनाने” के लिए है। इससे ग्रामीण श्रम-बाजार की गतिशीलता बदल जाएगी और मजदूरी पर आधारित ग्रामीण परिवारों को आर्थिक हानि पहुंचेगी।
नरेगा संघर्ष मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर विभिन्न गांवों में विरोध कार्रवाइयों हूई। इनके माध्यम से वी बी ग्राम जी को रद्द करने व मनरेगा को बहाल करने की मांग उठाई। इन विरोध कार्रवाइयों में रामचंद्र, वीर सिंह, सरिता, शकुंतला , सरोज, सुमन, नीलम, रीना, ममता, इंद्रावती, कमलेश लाहली, सतबीर, आकाश, निर्मला, रीना, निशा, रेखा, बबली, विद्या देवी, किरण, संगीता,बलवान, जगमेन्द्र, दलबीर, रामहेर, कर्ण सिंह, सुनील, उमेद, रामनिवास, नसीब, तिजो, गुड्डी आदि मजदूरों ने भाग लिया।

Exit mobile version