हरियाणा में 30 November तक होने वाले पंचायती चुनावो की तैयारियां जोरों शोरों से चल रही है। वहीं चुनाव के दौरान विभिन्न खबरें सामने आ रही है, जिस वजह से सरपंच बनने का सपना देख रहे भावी उम्मीदवार डरे हुए हैं। क्योंकि हाल ही में एक Notification जारी हुआ था जिसमे कहा गया था कि पंचायती चुनावों की तैयारियों की बाद नगर पालिकाओं व नगर परिषदों की वित्तीय शक्तियों को कम किया जाएगा।
जब से नगर पालिका और नगर परिषद की शक्तियों को कम करने का Notification जारी हुआ है, तब से नए बनने वाले सरपंचो में चिंता का माहौल बना हुआ है, कि कहीं नगर पालिका की वित्तीय शक्तियों की तरह ग्राम पंचायत की वित्तीय शक्तियों को भी कम ना कर दिया जाए। कहीं ऐसा ना हो कि नई पंचायत बनते ही सरकार पंचायतों की वित्तीय शक्तियों को भी समाप्त ना करदे। यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा प्रभाव गांव के विकास पर भी पड़ेगा।
बता दे कि 19 September को हरियाणा म्युनिसिपल Act 1973 के तहत बिजनेस बाई लाज मे नगर निकाय चेयरमैन की शक्ति में संशोधन के बाद एक Notification जारी किया गया जिसमें बताया गया कि नगर पालिका व नगर परिषदों प्रधानो की वित्तीय शक्तियों को कम कर दिया गया है। इस संशोधन के बाद नगर पालिकाओ व नगर परिषदों की संपूर्ण शक्तियां जिला नगर आयुक्त के हाथों में चली गई है।
सरकार के द्वारा लिए गए इस निर्णय के खिलाफ नगर पालिका व नगर परिषद के प्रधान एकजुट होकर सत्ता पक्ष पार्टी के विधायकों व मंत्रियों से मिलकर विरोध जताया है। अब देखना यह है कि सरकार प्रधानों द्वारा किए जा रहे विरोधो के बाद अपने निर्णय को वापस लेती है या नहीं। वहीं अब जल्द ही प्रदेश में पंचायती चुनावों का आयोजन भी करवाया जाएगा। ऐसे में सरकार के द्वारा लिए गए इस फैसले का खामियाजा Party को पंचायती चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

