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पानीपत का विनोद भराड़ा हत्याकांड: गोली मार कर आरोपी बोला- मेरा काम हो गया, भले ही अब मुझे मार दो

हारट्रोन कंप्यूटर सेंटर के मालिक विनोद भराड़ा (46) को गोली मारने वाले देव वर्मा उर्फ दीपक को अपने किए पर जरा भी पछतावा नहीं हुआ। भराड़ा की पत्नी का शोर सुनकर जब आसपास के लोग वहां पहुंचे तो वह पिस्तौल में तीसरी गोली लोड कर रहा था। भागने लगा तो लोगों के हत्थे चढ़ गया। उसकी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि मेरा तो काम हो गया, भले ही अब मुझे मार दो।

परमहंस कुटिया के पास बुधवार दोपहर विनोद भराड़ा की उसके घर में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। घर में उस दौरान वह बेडरूम में था, वहीं उसकी पत्नी रसोई में खाना बना रही थी। घर में दो गोलियां चली तो वह सहम गई। उसने शोर मचाया। पड़ोस में रहने वाला मिक्की चंदन सबसे पहले घर के दरवाजे पर पहुंचने वालों में शामिल था।

मिक्की ने बताया कि वो घर पर था। इसी बीच विनोद की पत्नी पिंकी भराड़ा ने आवाज लगाई कि घर में कोई घुस गया है। वो घर की तरफ की दौड़ा तभी दो गोली चलने की आवाज आई। घर का दरवाजा अंदर से बंद था। उन्होंने खिड़की के शीशे से झांका तो अंदर देव सुनार हाथ में पिस्तौल लेकर उसे लोड कर रहा था। उन्होंने शोर मचाया तो वह दरवाजे की कुंडी खोलकर भागने लगा।

मिक्की का कहना है कि उसने ही भागते देव को दबोचा। उसने तब कहा मेरा तो काम हो गया है, अब भले ही तुम मुझे मार दो। इसके बाद लोग उस पर टूट पड़े। मारपीट कर रस्सी से घर के बाहर खंभे पर बांध दिया गया। लोगों से बचने और भागने के प्रयास में उसे चोटें आई हैं। बाद में पुलिस को उसे नागरिक अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा।

करीब दो महीने पहले विनोद भराड़ा घर के बाहर बैठा था तो एक की टक्कर से उसके दोनों पांव टूट गए थे। इस गाड़ी को देव चला रहा था। इसके बाद भराड़ा के दोनों पांव में रॉड डाली गई। दुर्घटना के बाद से ही वह बिस्तर पर है। बुधवार दोपहर को जब उसे गोली मारी गई तब भी वह घर में बेडरूम में ही बैठा था।

दुर्घटना के बाद देव वर्मा उर्फ दीपक को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब वह जमानत पर बाहर आया था। वह मूल रुप से पंजाब के बठिंडा स्थित बलराज नगर का रहने वाला है। कई वर्षों से वह पास की कॉलोनी में रहता था। मामला दर्ज होने के बाद से ही वह परेशान था।

विनोद के चाचा वीरेंद्र भराड़ा का कहना है कि देव बार-बार विनोद के घर आता था और केस वापस लेने को कहता था। विनोद ने कह भी दिया था कि उसे ठीक होने दे, फिर समझौते पर बात करेंगे। अब तो वे उसे घर में भी नहीं घुसने देते थे। सभी आस पड़ोस वालों को भी इसका पता था और वे भी उसे भगा देते थे। बुधवार दोपहर को घर का दरवाजा खुला देख वह घर में घुस गया और विनोद की हत्या कर दी।

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