श्रीनगर में पानीपत के जवान सत्यजीत (25) शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर मंगलवार को श्रीनगर से हेलिकॉप्टर के जरिए दिल्ली भेजा गया। कुछ देर में उनका पार्थिव शरीर शेरा गांव में पहुंचेगा। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
सत्यजीत की करीब दो महीने बाद 5 अप्रैल को शादी होनी थी। जिसको लेकर घर में तैयारियां चल रहीं थी। वह खुद भी इसकी तैयारियों में जुटे हुए थे। 3 दिन पहले ही शादी की शॉपिंग करके ड्यूटी पर लौटे थे।
सत्यजीत शूटिंग के नेशनल स्तर के खिलाड़ी थे। उन्होंने गोल्ड मेडल भी जीता था। स्पोर्ट्स कोटे से ही वह आर्मी में भर्ती हुए थे।
पिता सज्जन सिंह ने बताया कि सत्यजीत 6 साल पहले स्पोर्ट्स कोटे से सेना की आरआर राइफल बटालियन में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। वह दो साल पहले हवलदार के पद पर पदोन्नत हुए थे। भर्ती होने से पहले उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी कई मेडल जीते थे। उनको हाल में ही आर्मी कमांडर पत्र से भी नवाजा गया था।
पिता बताते हैं कि 2 महीने बाद शादी थी इसलिए सत्यजीत शॉपिंग के लिए छुट्टी पर घर आए थे। शादी के वक्त ज्यादा लोड न पड़े, इसलिए कपड़े तैयार करवा लिए थे। 9 फरवरी को ही वो अपनी छुट्टियां खत्म कर ड्यूटी पर लौटे थे।
सज्जन सिंह बताते हैं कि 10 तारीख को उनके पास फोन आया कि सत्यजीत को गोली लगी है। ये सूचना मिलते ही पूरा परिवार चिंतित हो गया। परिवार बेटे के स्वस्थ होने की कामना कर ही रहा था कि 11 फरवरी को दोबारा फोन आया और बताया गया कि सत्यजीत शहीद हो गए हैं। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। हालांकि परिवार को ये नहीं पता लगा कि ये गालियां किस तरह लगी है।
सत्यजीत के पिता सज्जन सिंह खुद सेना से सूबेदार के पद से रिटायर्ड हैं। करीब आठ साल पहले वह सेना से रिटायर हुए थे। सत्यजीत अपने पिता सज्जन सिंह से काफी प्रभावित थे। वह हमेशा से ही अपने पिता की तरह देश की सेवा करना चाहते थे। यही कारण था कि स्पोर्ट्स में अच्छा करने के बावजूद उन्होंने सेना में जाना चुना।
अब परिवार में सत्यजीत के एक छोटे भाई हैं, जो परिवार के साथ मतलौडा में रहते हैं। सत्यजीत के अंतिम संस्कार में मंत्री, विधायक व प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल होंगे। परिवार के सदस्य उनके शव को लेने के लिए दिल्ली रवाना हो गए हैं।

