66 साल तक हरियाणा वासियों को मिठास देने वाली सबसे पुरानी Sugar मिल अब बहुत जल्द इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रही है। इस मिल की जमीन को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण देने की बात चल रही है। आने वाले 2 महीनों में 70 एकड़ जमीन HSVP को दे दी जाएगी। जिस जमीन पर वर्षों तक भाप के इंजन से चीनी बनाने का काम होता था, अब उस जमीन पर HSVP सेक्टर बनाकर लोगों के लिए आशियाने बनाएगा।
एचएसवीपी जमीन पर सेक्टर का निर्माण के साथ पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कई पार्कों का निर्माण भी करेगा। PWD ने इस मिल की इमारत की कीमती लगभग 8 करोड़ रुपये लगाई है। यह कीमती एचएसवीपी की तरफ से शुगर मिल को दी जाएगी। इस शुगर मिल की मशीनरी का कीमती नेशनल फेडरेशन दिल्ली द्वारा लगाई जा रही है, जिसका कार्य जल्द ही पूरा होकर इसकी Report Submit कर दी जाएगी।
इस मिल के MD नवदीप सिंह ने बताया कि फरवरी 1956 में भारत सरकार के सचिव D.N कृष्णमूर्ति द्वारा पानीपत शुगर मिल का लाइसेंस दिया गया था। अब शुगर मिल की जमीन को एचएसवीपी को सौंपने की तैयारी पूरी हो चुकी हैं, जिसको लेकर सभी बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पुरानी शुगर मिल की मशीनों की शिफ्टिंग का कार्य भी चल रहा है।
पुरानी मिल में चीनी की मात्रा अधिक होने के कारण उसके लिए वेयर हाउस या किसी भी विभाग के गोदाम को लेकर चीनी वहां शिफ्ट कर दी जाएगी और उसके बाद यह जमीन एचएसवीपी को दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस जमीन पर सेक्टर बनाने का अंतिम फैसला एचएसवीपी का होगा। नवदीप ने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित 69.04 एकड़ जमीन की धनराशि शुगर मिल में खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। 2 महीने के अंदर ही पूरी जमीन एचएसवीपी के नाम हो जाएगी।
नवदीप ने बताया कि 1956 में यह शुगर मिल शुरू की गई थी। इस मिल में तैयार की गई 77 लाख क्विंटल चीनी को अभी वेयरहाउस या किसी विभाग के गोदाम में शिफ्ट किया जाएगा। मार्च में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गोहाना रोड पर नई शुगर मिल का उद्घाटन किया था। इस नई शुगर मिल के बनने से हरियाणा के साथ लगते हुए दूसरे राज्य के किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पुरानी शुगर मिल व उसकी जमीन से मिलने वाली धनराशि को नई शुगर मिल के खाते में जमा किया जाएगा।

