रोहतक। रोहतक की अनाजमंडी में बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। मंडी में खुले में रखी धान और बाजरे की फसल भीग गई, जबकि सड़क पर रखी बोरियां गिरने से अनाज बिखर गया। तिरपाल के ऊपर पानी जमा होने से भी फसल को नुकसान पहुंचा। सरकारी खरीद में देरी के कारण किसान पहले से परेशान हैं और अब बारिश ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
खुले में रखी फसल बारिश में भीगी
मंडी पहुंचे किसान सुमित ने बताया कि धान की सरकारी खरीद धीमी गति से हो रही है। किसान अपनी फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं और उनके गेट पास भी काटे जा रहे हैं, लेकिन फसल की खरीद नहीं हो रही। शेड के नीचे पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण किसानों को धान और बाजरा खुले में रखना पड़ रहा है। बारिश के चलते फसल भीगने से किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। वहीं, जिन आढ़तियों ने धान सुखाने के लिए फैलाया था, उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
समर्थन मूल्य से कम भाव मिलने का आरोप
किसानों के अनुसार, सरकार ने पीआर धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल और बाजरे का समर्थन मूल्य 2,900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। किसानों का आरोप है कि फसल में नमी बताकर आढ़ती निर्धारित मूल्य से 300 से 400 रुपये कम भाव पर खरीद कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकारी खरीद शुरू होने के इंतजार में किसान कई दिनों से मंडी में बैठे हैं।
मंडी में पर्याप्त शेड बनाने की मांग
किसान नेता प्रीत सिंह ने कहा कि अनाजमंडी में किसानों को खुले आसमान के नीचे फसल रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गेहूं के सीजन में भी इसी तरह की परेशानियां सामने आती हैं। सरकार को मंडियों में पर्याप्त शेड बनवाने चाहिए, ताकि बारिश और खराब मौसम से किसानों की फसल को बचाया जा सके।
खरीद नहीं होने पर किसानों ने जड़ा था ताला
सरकारी खरीद में देरी से नाराज किसानों ने एक दिन पहले मार्केट कमेटी सचिव के कार्यालय पर ताला लगा दिया था। किसानों ने सरकारी खरीद शुरू करने की मांग उठाई थी। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिए जाने के बावजूद किसान अब भी अपनी फसल की खरीद का इंतजार कर रहे हैं।
किसान नेता बलवान ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद नहीं होने और नमी का हवाला देकर फसल नहीं खरीदे जाने से किसान आर्थिक संकट में हैं। उनका कहना है कि कुछ आढ़ती किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर कम कीमत पर फसल खरीद रहे हैं। ऐसे में किसानों को एक तरफ बारिश से नुकसान का डर है, तो दूसरी तरफ उचित मूल्य पर फसल नहीं बिकने की चिंता सता रही है।
