हरियाणा के झज्जर में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह का एक वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रीवेंस कमेटी की बैठक के बाद सचिवालय से बाहर निकल रहे मंत्री से एक कार्यकर्ता ने फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई, लेकिन जवाब ऐसा मिला कि वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
वीडियो में दिखाई दे रहा है कि मंत्री राव नरबीर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ रहे हैं। इसी दौरान भीड़ में खड़ा एक कार्यकर्ता उनसे कहता है, “सर, एक फोटो ले लूं।” इस पर मंत्री पहले कहते हैं, “क्यों, ले ले।” इसके बाद मुस्कुराते हुए टिप्पणी करते हैं, “आजकल हर चीज के पैसे लगते हैं।”
हालांकि मंत्री ने कार्यकर्ता के साथ फोटो नहीं खिंचवाई और आगे बढ़ गए। जब कार्यकर्ता कुछ और कहने के लिए आगे बढ़ा तो मंत्री ने उसे पीछे हटाते हुए “अरे हट” कह दिया। अब इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
पाइपलाइन की मांग पर भी तीखा जवाब
इसी दौरान एक अन्य व्यक्ति गांव में पानी निकासी के लिए पाइपलाइन बिछाने की मांग लेकर मंत्री के पास पहुंचा। उसने कहा कि अधिकारियों को भी इस समस्या के बारे में बताया जा चुका है।
इस पर मंत्री ने पूछा, “कौन सी लाइन, रेल लाइन या बिजली की लाइन?” व्यक्ति ने जवाब दिया, “पानी निकासी की पाइपलाइन।” इस पर मंत्री ने कहा, “फिर मैं क्या करूं?”
मंत्री और ग्रामीण के बीच हुई यह बातचीत भी चर्चा में बनी हुई है।
महिला की शिकायत पर दिया आश्वासन
वहीं एक महिला अपनी जमीन से जुड़े विवाद की शिकायत लेकर मंत्री के पास पहुंची। महिला ने बताया कि वह लंबे समय से अधिकारियों के चक्कर काट रही है और उसे न्याय नहीं मिल रहा।
इस पर मंत्री राव नरबीर ने महिला को आश्वस्त करते हुए कहा कि वह चिंता न करें, उनका काम कराया जाएगा।
तीन महीने पहले भी चर्चा में आई थी महिला
जानकारी के अनुसार शिकायत लेकर पहुंची महिला झज्जर के हसनपुर गांव की रहने वाली जगपति है। महिला इससे पहले करीब तीन महीने पहले भी एक मंत्री के काफिले को रोककर अपनी समस्या उठा चुकी है। उसका आरोप है कि 2011 में खरीदे गए प्लॉट की आज तक रजिस्ट्री नहीं हो सकी और संबंधित अधिकारियों ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
फिलहाल मंत्री और कार्यकर्ता के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। कई लोग इसे हल्के-फुल्के मजाक के तौर पर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को अपने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से बातचीत में अधिक संयम बरतना चाहिए।
