रोहतक। मासूम रूद्र अरोड़ा से जुड़े मामले में नगर निगम रोहतक के Joint Commissioner मनजीत कुमार को लेकर न्यायिक कार्यवाही में नया मोड़ सामने आया है। उपलब्ध न्यायालयीन आदेशों के अनुसार, Joint Commissioner को इस मामले से जुड़े एक मुकदमे में महत्वपूर्ण गवाह के तौर पर कोर्ट में पेश होना था। उनके कोर्ट में उपस्थित नहीं होने को लेकर निचली अदालत की ओर से वारंट संबंधी आदेश पारित किए गए। हालांकि, इसके बाद Municipal Corporation Rohtak की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मामला उठाया गया, जहां 5 अगस्त 2026 को 21 जुलाई और 28 जुलाई 2026 के आदेशों की operation पर रोक लगा दी गई।
गवाही के लिए होना था पेश
निचली अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, Rohit Vs. Dr. Anil etc., CS-1217-2018 मामले में Joint Commissioner, Municipal Corporation Rohtak की गवाही महत्वपूर्ण थी।
3 अगस्त 2026 के आदेश में अदालत ने दर्ज किया कि Joint Commissioner के संबंध में पहले समन और जमानती वारंट जारी किए जा चुके थे। इसके बावजूद उनकी गवाही के लिए कोर्ट में उपस्थिति नहीं हुई।
रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि Joint Commissioner की गिरफ्तारी से संबंधित वारंट वापस आने पर Bailiff की ओर से पुलिस सहायता की आवश्यकता बताई गई थी।
28 जुलाई को Non-Bailable Warrant का आदेश
28 जुलाई 2026 के आदेश में अदालत ने Joint Commissioner की उपस्थिति से संबंधित पूर्व कार्रवाई का उल्लेख किया। आदेश में कहा गया कि गवाह के रूप में उनकी गवाही आवश्यक थी और वह कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हुए।
इसके बाद अदालत ने Fresh Non-Bailable Warrant (NBW) जारी करने का आदेश दिया। साथ ही Bailiff को आवश्यक पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित SHO को निर्देश देने की बात आदेश में दर्ज की गई।
यह उल्लेख करना जरूरी है कि यह निचली अदालत द्वारा पारित आदेश था और बाद में हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट ने 21 और 28 जुलाई के आदेशों की कार्रवाई पर लगाई रोक
इसके बाद Municipal Corporation Rohtak Vs. Rohit and Others, CR-5878-2026 मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट के 5 अगस्त 2026 के आदेश में 21 जुलाई और 28 जुलाई 2026 को पारित आदेशों की operation पर रोक लगाए जाने का उल्लेख है।
हाईकोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 4 मार्च 2027 की तारीख तय की है।
इसका मतलब यह है कि निचली अदालत द्वारा पारित उक्त आदेशों के संबंध में आगे की कार्रवाई पर फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश का प्रभाव है। हाईकोर्ट की रोक का सटीक दायरा संबंधित आदेश के अनुसार ही देखा जाना है।
Joint Commissioner के खिलाफ अलग शिकायत का मामला
इसी घटनाक्रम के बीच कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, Joint Commissioner की कोर्ट में उपस्थिति से संबंधित मामले में BNS की धारा 208 के तहत अलग शिकायत भी सामने आई।
यह शिकायत Reader of the Court Shri Rakesh Kadian, ACJM Rohtak Vs. Shri Manjeet Kumar, Joint Commissioner के नाम से दर्ज की गई।
11 अगस्त 2026 के आदेश में अदालत ने शिकायत को चेक करके रजिस्टर करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है। इसी के तहत मनजीत कुमार को 29 अगस्त 2026 के लिए नोटिस जारी किया गया और Municipal Commissioner, Rohtak को उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
11 अगस्त को मूल मामले में हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी भी हुई पेश
11 अगस्त 2026 को मूल मामले की सुनवाई के दौरान Municipal Corporation Rohtak की ओर से Legal Assistant Sandeep Kumar कोर्ट में उपस्थित हुए और हाईकोर्ट के 5 अगस्त के आदेश की प्रति रिकॉर्ड पर रखी।
इस दौरान plaintiff की ओर से मौजूद proxy counsel ने कहा कि उन्हें हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी और मुख्य counsel इस संबंध में अदालत को अवगत कराएंगे।
इसके बाद मूल मामले में आगे की कार्यवाही के लिए 26 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की गई।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में अलग-अलग स्तर पर न्यायिक कार्यवाही जारी है।
- 26 अगस्त 2026 — मूल मामले में आगे की कार्यवाही।
- 29 अगस्त 2026 — BNS की धारा 208 के तहत दर्ज शिकायत में जारी नोटिस के संबंध में कार्यवाही।
- 4 मार्च 2027 — हाईकोर्ट में Municipal Corporation Rohtak से जुड़ी याचिका की अगली सुनवाई।
क्या है पूरा मामला?
उपलब्ध कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, Joint Commissioner मनजीत कुमार को एक मामले में गवाह के तौर पर कोर्ट में पेश होना था। उनकी उपस्थिति नहीं होने के बाद निचली अदालत ने वारंट और बाद में Non-Bailable Warrant से संबंधित आदेश पारित किए। इसी घटनाक्रम के दौरान कोर्ट की ओर से BNS की धारा 208 के तहत अलग शिकायत की प्रक्रिया भी शुरू हुई।
दूसरी ओर, Municipal Corporation Rohtak से जुड़ी याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 अगस्त 2026 को 21 और 28 जुलाई के आदेशों की operation पर रोक लगा दी।
अब आगे की सुनवाई में इस मामले की न्यायिक स्थिति और स्पष्ट होगी।
महत्वपूर्ण नोट: यह खबर उपलब्ध न्यायालयीन आदेशों में दर्ज तथ्यों और कार्यवाही पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति को दोषी या अपराधी नहीं ठहराया जा रहा है। मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायालय की आगे की कार्यवाही/निर्णय के अधीन है।
