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नंगथला हत्याकांड मामला- मृतक रमेश की एक अंतिम इच्छा पूरी, दूसरी के आगे रीति-रिवाज आ गए आड़े

अग्रोहा थाना क्षेत्र के गांव नंगथला के जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने वाले मृतक रमेश की उसका मकान न खोलने की अंतिम इच्छा को परिवार ने पूरा किया है। लेकिन सुसाइड नोट में लिखी उसकी दूसरी अंतिम इच्छा को परिवार ने पूरा नहीं किया। रमेश ने सुसाइड नोट में लिखा था कि कि उसकी अस्थियां और राख गांव के श्मशान घाट में लगे पौधों में बिखेर दी जाए।

लेकिन बुधवार अलसुबह उसके भाई और परिवार के अन्य लोग मृतक रमेश, उसकी पत्नी सविता, दोनों बेटियों अनुष्का व दीपिका, बेटे केशव की अस्थियां लेकर हरिद्वार गंगा में विसर्जन कर दी। परिवार के लोगों ने बताया कि रमेश ने जो किया वह उससे दुखी हैं। लेकिन वे रीति- रिवाजों के अनुसार ही सभी अंतिम क्रियांए पूरी करेंगे। इसलिए सभी मृतकों की अस्थियां गंगा में विसर्जित की हैं, परमात्मा से मृतकों की आत्मा की शांति के लिए कामना भी की हैं। बेशक रमेश ने अपनी अंतिम इच्छा कुछ भी बताई हो, लेकिन वे रमेश द्वारा किए गए इस हत्याकांड को ठीक नहीं मानतें।

इधर प्रकरण को लेकर मामले की हर पहलु से जांच में जुटी हुई है। अब तक हुई पुलिस कार्रवाई में सुसाइड नोट, हत्या में प्रयुक्त लोहे का सब्बल (रूंबा), खून से सने बिस्तर, कपड़े, मृतकों द्वारा खाए गए भोजन का सैंपल ले लिया गया हैं। जिसको अभी जांच के लिए भेजना हैं। इसके साथ पुलिस बरवाला अग्रोहा रोड पर जहां रमेश ने अज्ञात वाहन के सामने आकर आत्महत्या की वहां भी जांच कर अज्ञात वाहन चालक की तलाश कर है। वहां सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा हैं जिससे अज्ञात वाहन का पता लगाया जा सकें।

अग्रोहा थाना प्रभारी मनोज कस्वां ने बताया कि नृशंस हत्याकांड में पुलिस जांच कर रही है। अभी मामले में रमेश के द्वारा लिखे गए पूरे प्रकरण के नोट का, उसकी दूसरी डायरी, खाता अथवा बैंक के हस्ताक्षर के साथ मिलान करना है। वहीं फोरेंसिक टीम द्वारा एकत्र किए गए सैंपल की रिपोर्ट आनी बाकि है। सभी तथ्यों को लेकर पुलिस जांच कर रही है, जब तक सारी रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक जांच पड़ताल जारी रहेगी।

प्रकरण के बाद रमेश का घर स्वजनों ने चौथे दिन भी नहीं खोला। अभी गेट और कमरे में ताला लटका हुआ है। जैसा कि रमेश ने अपनी अंतिम इच्छा जाहिर करते हुए नोट में लिखा था कि उसके परिवार के मरने के बाद उसके घर को खोला न जाए। उसके घर में किसी का आना-जाना न रहें, जिससे कि उसकी आत्मा अपने घर में शांति के साथ रह सकें। स्वजनों ने उसकी इच्छा के अनुसार अभी तक घर को बंद ही रखा। शोक व्यक्त करने के लिए आने वाले ग्रामीण व अन्य रिश्तेदार मृतक रमेश के छोटे भाई सुनील के घर ही आ रहे हैं।

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