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मां ने फ्रिज में रखा 15 दिन का बच्चा, घर वाले भागे डॉक्‍टर के पास, जांच में सामने आई हैरान करने वाली वजह

मां बनना आसान काम नहीं है। इस सफर में महिलाएं कई बार शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करती हैं। लेकिन कभी-कभी स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि सोचकर भी यकीन करना मुश्किल होता है। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक महिला ने अपने 15 दिन के मासूम को फ्रिज में रख दिया। बच्‍चे को फ्रि‍ज में रखने के बाद मां खुद सोने चली गई। यह घटना मुरादाबाद शहर की है।

फ्रिज में बच्चे को रखने के बाद जब मासूम जोर-जोर से रोने लगा, तो उसकी आवाज सुनकर परिवार तुरंत मौके पर पहुंचा और बच्चे को बाहर निकाला। इसके बाद महिला को डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां पता चला कि उसे पोस्टपार्टम साइकोसिस नाम की गंभीर मानसिक बीमारी थी। आख‍िर क्‍या होती है ये बीमारी और क्‍या होते हैं इसके लक्षण, जान‍िए सबकुछ व‍िस्‍तार से।

clevelandclinic.org के मुताब‍िक पोस्‍टपार्टम साइकोस‍िस बीमारी (PPP) डिलीवरी के बाद मह‍िलाओं को होने वाली एक गंभीर मानसिक रोग है। इस स्‍थ‍ित‍ि से जूझ रही मह‍िला का वास्‍तव‍िक जीवन से संपर्क टूट जाता है। कई बार उन्हें ऐसी चीजें दिख सकती हैं या सुनाई दे सकती हैं जो असल में होती ही नहीं (मतिभ्रम), या फिर वे गलत धारणाएं और शक (भ्रम) करने लगती हैं। गंभीर हालात में महिला खुद को या अपने बच्चे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकती है।

www.nhs.uk के अनुसार यह तो पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि पोस्‍टपार्टम साइकोसिस बीमारी होने के पीछे की वजह क्‍या है, लेकिन कुछ स्थितियों में इसका खतरा बढ़ सकता है, जैसे- अगर महिला को पहले से बाइपोलर डिसऑर्डर या सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी हो, तो उसे अधिक इस बीमारी का जोखिम रहता है। वहीं, अगर परिवार में मानसिक बीमारी की ह‍िस्‍ट्री रही हो तो, खासकर postpartum psychosis की, तो भी यह समस्या हो सकती है।

www.nhs.uk के अनुसार, पोस्टपार्टम साइकोसिस के कुछ मुख्य लक्षण होते हैं। इसके तहत, महिला ऐसी चीजें देख सकती है, सुन सकती है या महसूस कर सकती है, जो असल में मौजूद नहीं होतीं (मतिभ्रम)। साथ ही डर, संदेह या ऐसे विचार और विश्वास भी हो सकते हैं जो सच होने की संभावना नहीं रखते (भ्रम)। इसके अलावा, महिला बहुत उत्तेजित या अतिसक्रिय महसूस कर सकती है, जैसे जोर-जोर से बात करना या सोचना, बेचैनी होना सह‍ित अन्‍य।

वाली मह‍िलाओं को पूरी तरह से ठीक होने में www.nhs.uk के अनुसार 6 से 12 महीने या कभी-कभी उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। हालांकि, अगर सही इलाज और मदद मिल जाए तो ज्यादातर महिलाएं पूरी तरह स्वस्थ हो जाती हैं। इस स्थिति से उबरने के बाद कभी-कभी अवसाद, चिंता या आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं। जो कुछ आपके साथ हुआ, उसे स्वीकार करने और मानसिक रूप से मजबूत होने में थोड़ा समय लगना स्वाभाविक है।

बच्चे के जन्म के बाद कभी- कभी महिलाएं थोड़ी चिड़चिड़ाहट या उदासी महसूस करती हैं। इसे आमतौर पर ‘बेबी ब्लूज’ हा जाता है। इसके लक्षण डिलीवरी के कुछ दिनों में अपने आप खत्म हो जाते हैं। अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशन के अनुसार, यह प्रसवोत्तर अवसाद का सबसे हल्का और कम गंभीर रूप माना जाता है।

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