केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर इन दिनों तीन दिवसीय करनाल प्रवास पर हैं। रविवार को वह करनाल के बालु गांव पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी, वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया यानी एसआईआर और नीट परीक्षा को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।
बालु गांव में मीडिया से बातचीत करते हुए मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि अक्सर यह सुनने को मिलता है कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि जनता के बीच नहीं जाते। इसी सोच को बदलने के लिए विधायकों और जनप्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गांव-गांव जाकर लोगों से मिलें, उनकी समस्याएं सुनें और समाधान की दिशा में काम करें।
उन्होंने कहा कि एक लोकसभा क्षेत्र में सैकड़ों गांव होते हैं और हर गांव में लगातार जाना संभव नहीं होता, लेकिन फिर भी सरकार और जनप्रतिनिधियों की कोशिश है कि अधिक से अधिक गांवों तक पहुंच बनाई जाए। उन्होंने बताया कि कुछ गांवों को चिन्हित कर वहां विशेष रूप से जनसंवाद अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लोगों की समस्याओं को सीधे सुना जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गांवों में विकास कार्य अलग-अलग स्तर पर किए जाते हैं। कुछ काम पंचायतों के जिम्मे होते हैं, कुछ राज्य सरकार और कुछ केंद्र सरकार के अधीन आते हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि हर गांव में मूलभूत सुविधाएं बेहतर हों और लोगों को योजनाओं का लाभ सीधे मिले।
वहीं एसआईआर यानी वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से इसका विरोध करता रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल वोटर लिस्ट को सही और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने कहा कि कई लोग गांव छोड़कर शहरों या विदेशों में बस चुके हैं, लेकिन उनके वोट अब भी गांवों में बने हुए हैं। कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति के दो जगह वोट होने की भी संभावना रहती है। एसआईआर के जरिए ऐसे डुप्लीकेट वोट हटाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में वोटर लिस्ट को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए लागू की जा रही है।
नीट परीक्षा को लेकर भी केंद्रीय मंत्री ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सरकार आवश्यक व्यवस्थाएं कर रही है। साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।
