रोहतक में पहली बरसात में ही शहर की कई कालोनियों के जलमग्न होने का मामला विधानसभा में गूंजा। रोहतक विधायक भारत भूषण बतरा ने विधानसभा में मामला उठाते हुए प्रशासन की नाकामी बताते हुए कहा सरकार सुनिश्चित करे कि जनता को बाढ़ जैसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। प्रशासनिक अधिकारियों को सर्वे और मुआवजे के लिए कहा लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। विधायक भारत भूषण बतरा ने विधानसभा में मुख्यमंत्री मनोहरलाल की मौजूदगी में कहा कि सरकार स्वीकार करें कि सिस्टम की खामी के चलते रोहतक को भारी जलभराव का सामना करना पड़ा। नुकसान के मुआवजे की भी मांग की है।
विधायक बतरा ने आरोप लगाए कि तीन फीट तक पानी में मैं खुद खड़े होकर हालातों को जानने घर-घर पहुंचा। विधायक ने कहा कि 30 जून को हुए भारी जलभराव के कारण छोटू राम चौक पर 3:30 फीट तक पानी एकत्रित हो गया, जिसके कारण दुकानों में तथा घरों में पानी घुसा और वहां भारी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि रोहतक का कोई इलाका ऐसा नहीं बचा जहां जलभराव नहीं हुआ हो।
विशेष रुप से रोहतक की महावीर कालोनी, कृष्णा कालोनी, गुरुनानक पुरा, टीबी अस्पताल के सामने लोगों के घरों में पानी दो दिन तक खड़ा रहा। इन इलाकों में भारी संपत्ति का नुकसान हुआ। बतरा ने पूछा कि जलभराव का क्या कारण रहा है और लोगों को उनके नुकसान के लिए मुआवजा उपलब्ध करवाने के लिए कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है तो इसका पूरा ब्योरा दिया जाए। पहली बरसात में नुकसान का आंकलन करने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी कालोनियों में गए थे। इसी के बाद पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर भी जनस्वास्थ्य विभाग के चीफ इंजीनियर को लेकर पहुंचे। एक जेई को इस प्रकरण में सस्पेंड भी किया था, बाद में जेई ने हड़ताल कर दी तो बहाल कर दिया था।

