रोहतक के रुड़की गांव की 23 साल की मीनाक्षी हुड्डा ने इंग्लैंड में आयोजित हुई वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल लाकर इतिहास रच दिया है. कभी मीनाक्षी हुड्डा के पिता कृष्ण अपनी बेटी को खेलने से रोकते थे. इसी वजह से मीनाक्षी की मां अपने पति के डर से चोरी-छिपे उसे खेलने के लिए भेजती थी और जब घर में मीनाक्षी के पिता को पता चला तो घर में खूब लड़ाई-झगड़ा भी हुआ. हालांकि गांव में ही कोच विजय हुड्डा ने उन्हें बेटी को खेलने की परमिशन देने के लिए मना लिया.
इंग्लैंड के लिवरपूल में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कजाकिस्तान की खिलाड़ी नाजिम काइजेबे को 48 किलोग्राम भार वर्ग में 4-1 से हराकर मीनाक्षी ने चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया है. नाजिम काइजेबे वही खिलाड़ी है जिसने मीनाक्षी को कजाकिस्तान में जुलाई 2025 में हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग कप अस्ताना 2025 के फाइनल में 3-2 से हरा दिया था. मीनाक्षी हुड्डा मंगलवार सुबह घर लौटेगी.
मीनाक्षी हुड्डा के गोल्ड मेडल हासिल करने पर पूरे गांव में खुशी का माहौल है और लोगों ने परिवार समेत एक दूसरे को मिठाई खिलाई. मीनाक्षी हुड्डा की उपलब्धि पर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर उसे बधाई दी है.

मीनाक्षी हुड्डा के पिता कृष्ण पहले किराए का ऑटो चलाते थे. 2022 में आईटीबीपी में नौकरी लगने के बाद बेटी ने उन्हें चलाने के लिए ऑटो खरीदकर दिया है जिसे वे अब चलाते हैं. जिस वक्त मीनाक्षी ने गोल्डन पंच लगाया, उस दौरान उनके पिता कृष्ण हुड्डा ऑटो ही चला रहे थे. जैसे ही उन्हें मीनाक्षी की उपलब्धि का पता चला तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वे ऑटो को घर ले आए. कृष्ण ने मीनाक्षी के बारे में बोलते हुए कहा कि “बड़ी मुश्किल से उनके परिवार का गुजारा होता है. ऐसे में मीनाक्षी खेलने की जिद करती थी लेकिन गांव वालों और समाज के डर से मीनाक्षी को बाहर भेजना नहीं चाहते थे. लेकिन बाद में कोच के कहने पर अपना फैसला बदला और आज बेटी की उपलब्धि पर गर्व महसूस हो रहा है.”
मीनाक्षी हुड्डा ने शुरुआत में हैंडबॉल खेला लेकिन वर्ष 2013 में रूड़की गांव में ही उसने बॉक्सिंग खेलना शुरू किया था. मीनाक्षी हुड्डा ने वर्ष 2017 में जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, वर्ष 2019 में नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, वर्ष 2021 में सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में रजत पदक और वर्ष 2024 में ब्रिक्स व एलोर्डा कप में स्वर्ण पदक जीता था.
मीनाक्षी हुड्डा की तीन बहनें और एक भाई है. मीनाक्षी बहनों में सबसे छोटी हैं. मीनाक्षी से बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है. मीनाक्षी की मां सुनीता ने घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए घर में भैंस रखकर दूध बेचना शुरू किया था और अच्छी आर्थिक स्थिति नहीं होने के बावजूद भी उन्होंने हमेशा अपने बेटी को खेलने के लिए सपोर्ट किया. सुनीता कहती हैं कि “मीनाक्षी खेलने के लिए जिद करती थी और मीनाक्षी के पिता के डर से चोरी छुपे उसे खेलने के लिए भेजना पड़ता था, आज उन्हें अपने फैसले पर गर्व है. आज प्रधानमंत्री भी मीनाक्षी की तारीफ कर रहे हैं जिससे खुशी हो रही है”
