रोहतक स्थित PGI में भूख हड़ताल पर बैठी MBBS 2021 बेच की छात्रा रीना की रविवार रात को अचानक तबीयत बिगड़ गई। बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए छात्रा को उपचार के लिए इमरजेंसी में भर्ती करवाया गया है। विद्यार्थियों ने छात्रा की तबीयत खराब होने का कारण सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
MBBS छात्रों ने कहा कि एक तरफ बच्चों की जान पर बनी है और उनकी तबीयत खराब हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता के घमंड में चूर सरकार को कोई चिंता नहीं है। सरकार इतनी अंधी हो गई है कि छात्रों पर यह गलत पॉलिसी लागू कर रही है।
MBBS स्टूडेंट ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बहरे हो गए हैं, जिन्हें न्याय मांग रही विद्यार्थियों की आवाज तक नहीं सुनाई दे रही। जिस जनता के लिए सरकार है, आज उसी जनादेश की अनदेखी यह तानाशाही सरकार कर रही है।
MBBS छात्रों का धरना पिछले 27 दिनों से जारी है। लगातार धरने पर बैठे छात्रों ने 24 नवंबर से भूख हड़ताल भी शुरू कर दी। भूख हड़ताल पर बैठे 3 छात्रों की तबीयत खराब हो गई, जिन्हें उपचार के लिए इमरजेंसी में भर्ती करवाना पड़ा। वहीं अब सभी छात्र ठीक है।
इधर, पीजीआइ में 12 छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। साथ ही छात्रों का कहना है कि अब आंदोलन सरकार के निर्णय पर तय होगा। अगर सरकार उनकी मांग मान लेती है तो वे आंदोलन समाप्त कर देंगे। अगर मांगें नहीं मानी जाती तो उनका आंदोलन और भी अधिक तेज किया जाएगा। जिसमें विभिन्न संगठन समर्थन कर चुके हैं।
MBBS स्टूडेंट ने कहा कि देशभर के करीब 16 प्रदेशों में तो बॉन्ड पॉलिसी लागू ही नहीं होती। जिन प्रदेशों में लागू की जा रही है, वहां सर्विस बॉन्ड पॉलिसी लागू है। जब MBBS स्टूडेंट पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी संसथान में सेवा नहीं देते तो उन्हें बॉन्ड की राशि देनी होती है। जबकि हरियाणा में पहले ही विद्यार्थियों पर लोन का बोझ डाला जा रहा है।
छात्रों ने कहा कि सरकार अब 40 लाख रुपए का बोझ डाला जा रहा है। जब अधिकारियों से बातचीत हुई तो उनका कहना था कि यह सर्विस बॉन्ड नहीं है। विद्यार्थियों से फीस के रूप में लिए जा रहे हैं। ताकि विद्यार्थियों पर होने वाले खर्च को पूरा किया जा सके। जिसके कारण विद्यार्थियों में रोष है।
MBBS स्टूडेंट्स ने रोहतक पीजीआइ में बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में 1 नवंबर को धरना आरंभ किया था। जो लगातार जारी है। इस 26 दिन के अंतराल में विद्यार्थियों ने अलग-अलग तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। अब भूख हड़ताल शुरू कर दी है। साथ ही अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।
MBBS स्टूडेंट ने कहा कि नई बॉन्ड पॉलिसी के तहत उन्हें प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए देने होंगे। चार साल में विद्यार्थियों को कुल 40 रुपए देने पड़ेंगे। जबकि प्रतिवर्ष करीब 80 हजार रुपए फीस लगती थी। इस पॉलिसी के तहत MBBS स्टूडेंट्स को 7 साल तक सरकारी संस्थानों में सेवाएं देनी होंगी। जबकि छात्रों की मांग है कि 40 लाख की राशि का बॉन्ड हटाया जाए। साथ ही वे सेवा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकारी संस्थाओं में ड्यूटी करने की अवधि 7 साल से घटाकर एक साल की जाए। क्योंकि अगले वर्ष नए छात्र मिल जाएंगे।
