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88 किलो अफीम केस में बड़ा खुलासा…जांच अधिकारी ASI ही निकला तस्करी नेटवर्क का हिस्सा, गिरफ्तार होते ही बर्खास्त

हरियाणा के सिरसा जिले में 88.970 किलोग्राम अफीम बरामदगी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जिस मामले की जांच खुद पुलिस कर रही थी, उसी प्रकरण में जांच अधिकारी एएसआई रणबीर सिंह की कथित संलिप्तता सामने आने से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

फतेहाबाद के भट्टू थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एएसआई रणबीर सिंह को गिरफ्तार कर सिरसा पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने अफीम सप्लाई नेटवर्क से जुड़े शमशेर नामक आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। शमशेर से पूछताछ के दौरान एएसआई रणबीर सिंह की भूमिका सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।

एएसपी आदर्शदीप सिंह के अनुसार, रणबीर सिंह करीब एक माह पहले हांसी से तबादला होकर सिरसा आया था और उसकी तैनाती डिंग मंडी थाना में की गई थी। प्रारंभिक जांच में तस्करी नेटवर्क से उसके संबंधों के संकेत मिलने पर उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे सेवा से बर्खास्त भी कर दिया है।

राजस्थान पुलिस के इनपुट पर पकड़ी गई थी खेप

गौरतलब है कि राजस्थान पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर सिरसा पुलिस ने भावदीन टोल प्लाजा के पास नाकाबंदी की थी। इस दौरान एक ट्रक की तलाशी में 88.970 किलोग्राम अफीम बरामद हुई थी। मौके से ट्रक चालक सुखराम निवासी पाली (राजस्थान) को गिरफ्तार किया गया था।

बाद में पूछताछ के आधार पर ट्रक मालिक गगनदीप सिंह को जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अफीम की खेप कहां से लाई गई थी और इसकी सप्लाई किन लोगों तक की जानी थी।

NCB चंडीगढ़ करेगी आगे की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब NCB चंडीगढ़ को सौंप दी गई है। एएसपी आदर्शदीप सिंह ने बताया कि बरामद अफीम का दोबारा वजन कराया जाएगा ताकि सभी तथ्यों की पुष्टि की जा सके। पूरे तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।

विभाग में मचा हड़कंप

नशा तस्करी के इतने बड़े मामले में एक पुलिस अधिकारी का नाम सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन ने आरोपी एएसआई के खिलाफ तत्काल कार्रवाई कर सख्त संदेश देने का प्रयास किया है। अधिकारियों का कहना है कि नशा तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह पुलिस विभाग का कर्मचारी ही क्यों न हो।

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