हरियाणा सरकार ने राजस्व व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पटवार सर्किलों के पुनर्गठन (Restructuring) का निर्णय लिया है। इस संबंध में सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले के तहत अब पटवार सर्किलों का निर्धारण केवल भूमि क्षेत्र के आधार पर नहीं, बल्कि आबादी और वास्तविक कार्यभार को ध्यान में रखकर किया जाएगा।सरकार का मानना है कि डिजिटल फसल सर्वेक्षण, ऑनलाइन म्यूटेशन, भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और नागरिक सेवाओं में बढ़ोतरी के कारण पटवारियों का कार्यभार काफी बढ़ गया है, जिससे मौजूदा व्यवस्था को अपडेट करना जरूरी हो गया था।
🔹 नई व्यवस्था के प्रमुख बिंदुअब एक पटवार सर्किल का मानक लगभग 2000 एकड़ कृषि भूमि होगा। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार यह सीमा 1500 से 2500 एकड़ तक तय की जा सकेगी। प्रत्येक सर्किल में संबंधित राजस्व एस्टेट की आबादी देह को भी शामिल किया जाएगा।अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में छोटे सर्किल बनाए जाएंगे ताकि कार्यभार संतुलित रहे। ग्रामीण एवं शहरी जरूरतों के अनुसार अलग-अलग मानक लागू होंगे।
सरकार का उद्देश्यइस नए मॉडल से पटवारियों के कार्यभार का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव होगा। साथ ही भूमि रिकॉर्ड, म्यूटेशन प्रक्रिया और नागरिक सेवाओं में तेजी आने की उम्मीद है। कई जिलों में नए पटवार सर्किलों के गठन और पुनर्गठन की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे अतिरिक्त पदों की आवश्यकता उत्पन्न हो सकती है। हरियाणा सरकार ने इसे प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
