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रैक्सिल फंगीसाइड खरीद मामले में पूर्व CM भूपेंद्र हुड्डा को बड़ी राहत: 14 साल पुराने केस में CBI कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की, 2 IAS अधिकारी भी आरोपों से मुक्त

पंचकूला। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को रैक्सिल फंगीसाइड खरीद मामले में बड़ी राहत मिली है। पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने करीब 14 साल पुराने कथित घोटाले की जांच में दाखिल क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा और दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ यह मामला बंद हो गया है।

CBI की जांच में अधिकारियों के बीच आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी या सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। जांच एजेंसी को किसी अधिकारी के निजी आर्थिक लाभ लेने के भी प्रमाण नहीं मिले।

क्या था रैक्सिल फंगीसाइड खरीद मामला?

यह मामला वर्ष 2010 का है। उस समय हरियाणा में गेहूं के प्रमाणित बीजों के उपचार के लिए बायर कंपनी के रैक्सिल फंगीसाइड का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया था। आरोप था कि 6 अक्टूबर 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया था।

आरोप लगाया गया था कि किसानों और बीज विक्रेताओं को सरकारी सब्सिडी का लाभ लेने के लिए इसी फंगीसाइड की खरीद जरूरी कर दी गई। इसकी आपूर्ति एक ही फर्म के माध्यम से करवाने और कीमतें बढ़ाकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप था।

2015 में CBI ने दर्ज किया था केस

हरियाणा सरकार के सतर्कता विभाग ने मामले की जांच CBI से करवाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। इसके बाद 21 अगस्त 2015 को CBI ने IPC की धारा 120-B और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी।

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के अलावा दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था।

जांच में नहीं मिले साजिश और भ्रष्टाचार के सबूत

CBI की जांच में सामने आया कि रैक्सिल के इस्तेमाल की सिफारिश वर्ष 2003 में ही कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने की थी। गेहूं की फसल को तीन प्रमुख बीमारियों से बचाने के लिए वैज्ञानिक आधार पर इस दवा का चयन किया गया था।

जांच में दवा की कीमतों को लेकर भी अहम तथ्य सामने आए। पंजाब स्टेट सीड कॉरपोरेशन और नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन ने भी इसी दर पर दवा खरीदी थी, जिस दर पर हरियाणा में इसकी आपूर्ति हुई थी। इससे अधिक कीमत वसूलने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।

खरीद की शर्त हटाने में भी नहीं मिली गलत मंशा

मामले में हाई पावर परचेज कमेटी (HPPC) द्वारा 29 मार्च 2013 के सप्लाई ऑर्डर से ‘बेस्ट डीलर रेट’ की शर्त हटाने पर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, जांच में इस फैसले के पीछे किसी को अनुचित लाभ पहुंचाने या बेईमानी की मंशा के पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

हरियाणा सरकार ने भी क्लोजर रिपोर्ट पर जताई सहमति

अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि शिकायतकर्ता हरियाणा सरकार ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर अपनी सहमति और अनापत्ति जताई थी। अदालत ने जांच के निष्कर्षों पर विचार करने के बाद क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली।

14 साल पुराने मामले का हुआ अंत

अदालत के इस फैसले के बाद रैक्सिल फंगीसाइड खरीद से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दोनों IAS अधिकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। CBI की जांच में आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले और अदालत ने आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी।

इस फैसले के साथ हरियाणा की राजनीति से जुड़े चर्चित रैक्सिल फंगीसाइड खरीद मामले का कानूनी अध्याय समाप्त हो गया है।

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