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अस्पताल में बड़ी लापरवाही: दो नवजातों को चूहों ने कुतरा, स्टाफ पर सस्पेंशन की कार्रवाई

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित महाराजा यशवंत राव हॉस्पिटल (MYH) में 1 सितंबर की रात एक ऐसी भयावह घटना घटी जिसने पूरे देश को हिला दिया। अस्पताल के नवजात शिशु इकाई (NICU) और बाल चिकित्सा आईसीयू (PICU) में भर्ती दो नवजात शिशुओं को चूहों ने कुतर लिया। इस घातक हमले के बाद दोनों मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई।

यह घटना अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही का प्रतीक है। वह जगह जहां जिंदगियां बचाई जाती हैं, वहीं पर दो नन्हें-मुन्ने बच्चों को चूहों के हमले से मारा गया। यह सोचकर भी रूह कांप जाती है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर चूहों का जाल कैसे फैल सकता है।

घटना का पता चलते ही अस्पताल प्रशासन और सरकार ने तुरंत एक्शन लिया सहायक अधीक्षक और भवन प्रभारी डॉ. मुकेश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया नर्सिंग ऑफिसर श्रीमती प्रवीणा सिंह को भी सस्पेंड कर दिया गया पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. ब्रजेश लाहोटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया अस्पताल में पेस्ट कंट्रोल की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया गया

अस्पताल के डीन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए साफ कह दिया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद नर्स और नर्सिंग अधीक्षक को तुरंत सस्पेंड करने के आदेश दिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने 5 डॉक्टरों की एक विशेष जांच टीम बनाई है। यह टीम पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि

आखिर अस्पताल में चूहों का प्रकोप कैसे बढ़ा?

जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी ड्यूटी का पालन क्यों नहीं किया?

भविष्य में ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है?

सरकारी प्रेस नोट में साफ लिखा गया है कि यह पूरा मामला गंभीर लापरवाही का है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच पूरी होने के बाद और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में किसी भी अस्पताल में ऐसी हालत न बने।

यह घटना न केवल अस्पताल प्रबंधन बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक करारा झटका है। दो मासूम जिंदगियों की कीमत चुकाने के बाद अब सवाल यह है कि आखिर कब तक हमारे अस्पताल ऐसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में मरीजों की जान जोखिम में डालते रहेंगे?

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