राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमा में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश का मौजूदा NCR क्षेत्र पहले की तरह बरकरार रहेगा।
पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही थी कि हरियाणा के करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी जिलों को NCR से बाहर किया जा सकता है। हालांकि बैठक में इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया गया और राज्य के 23 जिलों में से वर्तमान में NCR में शामिल 14 जिले यथावत रहेंगे।
इन 14 जिलों का NCR में बना रहेगा शामिल होना: गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, पलवल, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झज्जर, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, करनाल, जींद, भिवानी और चरखी दादरी।
4 आधुनिक नमो सिटी विकसित करने की तैयारी:- बैठक में NCR क्षेत्र में 4 आधुनिक “नमो सिटी” विकसित करने पर भी चर्चा हुई। हालांकि इन शहरों का स्थान अभी तय नहीं किया गया है। इसके लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो राज्यों से सुझाव लेकर अपनी रिपोर्ट देगी। NCR प्लान-2041 के लिए भी एक सब-कमेटी बनाई गई है, जो 15 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपेगी।
क्यों थी NCR सीमा घटाने की चर्चा?:- दिसंबर 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सुझाव दिया था कि दिल्ली से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी वाले क्षेत्रों को NCR में रखने का विशेष लाभ नहीं मिल रहा। उनका तर्क था कि ऐसे जिलों को NCR के नियमों और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है, लेकिन विकास के अपेक्षित लाभ नहीं मिलते।
किन जिलों पर पड़ता सबसे ज्यादा असर? यदि NCR का दायरा घटता तो सबसे अधिक असर महेंद्रगढ़ जिले पर पड़ता, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा 100 किलोमीटर की सीमा से बाहर है। जींद, भिवानी और चरखी दादरी के कई क्षेत्रों पर भी प्रभाव पड़ सकता था।
राजस्थान पर भी पड़ता बड़ा असर: NCR सीमा में बदलाव होने पर राजस्थान का अधिकांश हिस्सा NCR से बाहर हो सकता था और केवल भिवाड़ी ही NCR में रह जाता। यही वजह रही कि राजस्थान इस बदलाव के पक्ष में नहीं था।
हाईवे कॉरिडोर का प्रस्ताव: हरियाणा सरकार ने NCR में अपना समावेश बनाए रखने के लिए 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर बनाए रखने का प्रस्ताव रखा है। इससे करनाल, पानीपत, भिवानी और चरखी दादरी जैसे जिलों को लाभ मिलने की संभावना है।
उद्योगों पर NCR नियमों का असर: पानीपत के कई उद्यमी NCR से बाहर होने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) और प्रदूषण नियंत्रण के सख्त नियमों के कारण उद्योगों को अतिरिक्त लागत और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।
