दिवाली की रात हरियाणा में खूब आतिशबाजी हुई। सरकार ने सिर्फ दो घंटे आतिशबाजी की एडवाइजरी जारी की थी, लेकिन शाम 7 बजे से 12 बजे तक जमकर पटाखे फोड़े गए। इससे प्रदूषण की स्थिति और खराब हो गई।
हरियाणा गैस चैंबर में तब्दील हो चुका है। हिसार और कुरुक्षेत्र में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां पार्टिकुलेट मैटर (PM) 2.5 और पीएम 10- 500 के पार पहुंच गए हैं। यह इतना खतरनाक है कि घर से बाहर निकलने पर स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार पड़ सकता है।
इसके अलावा हरियाणा के 10 शहरों अंबाला, फरीदाबाद, गुरुग्राम, जींद, पंचकूला, रोहतक, यमुनानगर, हिसार और कुरुक्षेत्र में AQI 500 के पार पहुंच गया है।
WHO के मुताबिक वायु प्रदूषण से इन बीमारियों का खतरा
1. अस्थमा: सांस लेने में कठिनाई होती है, छाती में दबाव महसूस होता है और खांसी भी आती है। ऐसा तब होता है जब व्यक्ति की श्वसन नली में रुकावट आने लगती है। यह रुकावट एलर्जी (हवा या प्रदूषण) और कफ से आती है। कई रोगियों में यह भी देखा गया है कि सांस लेने की नली में सूजन भी आ जाती है।
2. फेफड़ों का कैंसर: स्मॉल सेल लंग कैंसर (SCLC) प्रदूषण और धूम्रपान से होने वाला कैंसर है। इसका पता तब चलता है जब SCLC शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैल चुका होता है। साथ ही, नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) तीन तरह के होते हैं। एडेनोकार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और लार्ज सेल कार्सिनोमा।
3. हार्ट अटैक: वायु प्रदूषण से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। जहरीली हवा के PM 2.5 के बारीक कण खून में चले जाते हैं। इससे धमनियों में सूजन आ जाती हैं।
4. बच्चों में सांस की दिक्कत: बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होती है। यह नाक, गले और फेफड़ों को संक्रमित करता है, जो सांस लेने में मदद करने वाले अंग हैं। बच्चों को इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। 5 साल से कम उम्र के बच्चे इस बीमारी से सबसे ज्यादा मरते हैं।
5. क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) : क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) एक सांस संबंधी बीमारी है जिसमें मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है। यह बहुत खतरनाक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक सबसे ज्यादा लोग सीओपीडी से मरते हैं।
डॉक्टर की सलाह- सुबह-शाम घर से बाहर जाने से बचें हिसार में गीतांजली अस्पताल के फिजिशियन डॉ. कमल किशोर कहते हैं आप पहले से बीमार हों या स्वस्थ, प्रदूषण सभी के लिए खतरनाक है। प्रदूषण के पीक वाले समय जैसे सुबह-शाम घर से बाहर जाने से बचें। पटाखों के धुएं से खुद को बचाएं। अस्थमा रोगियों के लिए इन बातों का ध्यान रखना और भी जरूरी हो जाता है। घर के भीतर की हवा को साफ-स्वच्छ करने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। जहां प्रदूषण का स्तर ज्यादा है वहां मास्क पहनकर रखें, जिससे प्रदूषण आपके शरीर में न प्रवेश कर पाए। किसी भी समय आपको सांस की दिक्कत, छाती में दर्द या जकड़न महसूस होती है तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
