भिवानी/हरियाणा। जमीन से जुड़े काम आसान और तेज करने के लिए शुरू की गई ऑनलाइन व्यवस्था अब कई जमीन मालिकों और राजस्व कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बनती दिखाई दे रही है। हरियाणा के नए रेवेन्यू पोर्टल में तकनीकी खामियों की शिकायतें सामने आई हैं। कहीं इंतकाल का प्रिंट खाली निकलने, कहीं रिकॉर्ड में मालिक का नाम नहीं दिखने तो कहीं जमीन का रकबा कम दिखाई देने की शिकायत की जा रही है। एक पेज का इंतकाल 170 पन्नों तक और दो पेज की जमाबंदी 50 पन्नों में निकलने जैसी गड़बड़ियों का भी दावा किया गया है।
इन तकनीकी समस्याओं को लेकर पटवारी और कानूनगो भी आंदोलन कर चुके हैं। भिवानी में एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि नए पोर्टल पर जमाबंदी और इंतकाल से जुड़ी तकनीकी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। कर्मचारियों की मांग है कि सॉफ्टवेयर या सिस्टम से होने वाली तकनीकी गलतियों की जवाबदेही आईटी विभाग की तय की जाए।
जमीन मालिकों की बढ़ी चिंता
सबसे बड़ी चिंता जमीन के रिकॉर्ड को लेकर है। शिकायतों के मुताबिक, पटवारी द्वारा इंतकाल में दर्ज हिस्सा प्रिंट में अलग दिखाई दे सकता है या कई बार प्रिंट खाली निकल रहा है। नए मालिक का नाम नहीं दिखने और रजिस्ट्री के मुकाबले ऑनलाइन रिकॉर्ड में कम जमीन दिखाई देने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे में जमीन मालिकों को रिकॉर्ड ठीक कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पटवारी-कानूनगो का कहना है कि वे ऑनलाइन व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि तकनीकी खामियां दूर करने के बाद ही सिस्टम को पूरी तरह लागू किया जाए। उनकी मांग है कि नई व्यवस्था को पहले सीमित स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जांचा जाता तो कई समस्याओं को पहले ही पकड़ा जा सकता था।
इस विवाद का असर सरकारी कामकाज पर भी पड़ा है। भिवानी में हड़ताल के चार दिनों के दौरान प्रमाणपत्र, जमाबंदी, पैमाइश और अन्य राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े करीब 900 मामलों के लंबित होने की खबर सामने आई थी।
इस बीच सरकार ने डिजिटल क्रॉप सर्वे से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं की मौके पर जांच कराने का फैसला किया है। वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों को गांवों में जाकर प्रक्रिया देखने और रिपोर्ट देने को कहा गया है
