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हरियाणा में पूरी तरह डिजिटल होंगे जमीन के रिकॉर्ड, फर्जी रजिस्ट्रियों पर लगेगी रोक: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

चंडीगढ़, 20 जुलाई। हरियाणा सरकार ने राजस्व विभाग में डिजिटल परिवर्तन की प्रक्रिया को और तेज करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को हरियाणा निवास में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व से जुड़ी सभी सेवाएं तकनीक आधारित, पारदर्शी और निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराई जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण का कार्य मिशन मोड में पूरा किया जाए, ताकि नागरिकों को बिना किसी अनावश्यक देरी के सरल और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें। उन्होंने सभी उपायुक्तों को राजस्व शिकायतों के निपटान की व्यवस्था और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए।बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी अस्वीकृत आवेदनों में कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। साथ ही ऐसे मामलों की समय-समय पर रैंडम जांच भी की जाएगी, ताकि कोई पात्र व्यक्ति प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण सरकारी सेवाओं से वंचित न रहे। उन्होंने निर्देश दिए कि साप्ताहिक समाधान शिविरों में तहसीलदार एवं अन्य राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, जिससे लोगों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान हो सके।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि सरकार द्वारा स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश के 6,761 गांवों में 25.16 लाख संपत्ति मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 95 प्रतिशत गांवों के नक्शे भू-नक्शा पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं तथा लगभग 42 लाख आधार नंबर पुराने राजस्व रिकॉर्ड से जोड़े गए हैं।

राजस्व विभाग द्वारा 5 लाख से अधिक लंबित इंतकाल (म्यूटेशन) मामलों का निपटारा किया जा चुका है। वहीं सरल पोर्टल की लगभग 80 प्रतिशत सेवाओं को ऑटो-अपील प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे तय समय सीमा के भीतर कार्य नहीं होने पर मामला स्वतः उच्च स्तर पर पहुंच जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल रजिस्ट्रेशन सुधारों के कारण सरकार को अब तक 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एग्री स्टैक किसान रजिस्ट्री अभियान को गति दी जाए और किसानों को अधिक से अधिक संख्या में इससे जोड़ा जाए। उन्होंने लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि 15 अगस्त तक अधिकतम किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे भविष्य में शुरू होने वाली डिजिटल कृषि योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल होने से फर्जी रजिस्ट्रियों और रिकॉर्ड में हेराफेरी पर प्रभावी रोक लगेगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं का लाभ पहले से अधिक सरलता और तेजी से मिलेगा। बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, प्रदेश के सभी उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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