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हरियाणा में पूरी तरह डिजिटल होंगे जमीन के रिकॉर्ड:CM बोले-फर्जी रजिस्ट्री पर लगेगी रोक, 40.20 करोड़ पुराने रिकॉर्ड ऑनलाइन

हरियाणा सरकार ने राजस्व विभाग में डिजिटल बदलाव की रफ्तार तेज कर दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को हरियाणा निवास में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व से जुड़ी सभी सेवाएं तकनीक आधारित, पारदर्शी और तय समय सीमा में उपलब्ध कराई जाएं।

उन्होंने सभी उपायुक्तों से कहा कि राजस्व शिकायतों के निपटान की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए तथा भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण का काम मिशन मोड में पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों को बिना किसी अनावश्यक देरी के सरल और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है। बैठक में सभी जिलों के उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

 मुख्यमंत्री ने शिकायत निवारण प्रणाली को और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर अस्वीकृत आवेदन में स्पष्ट कारण दर्ज किया जाए तथा उसकी समय-समय पर रैंडम जांच भी हो, ताकि कोई पात्र व्यक्ति प्रक्रियागत त्रुटि के कारण लाभ से वंचित न रह जाए। साथ ही सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि साप्ताहिक समाधान शिविरों में तहसीलदार और राजस्व अधिकारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहें, ताकि मौके पर ही समस्याओं का समाधान हो सके।

 सरकार ने 6,761 गांवों में 25.16 लाख संपत्ति मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए हैं। वहीं 95% गांवों के नक्शे भू-नक्शा पोर्टल पर अपलोड हो चुके हैं। लगभग 42 लाख आधार नंबर पुराने राजस्व रिकॉर्ड से जोड़े जा चुके हैं।

अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने 5 लाख से अधिक लंबित म्यूटेशन (इंतकाल) मामलों का निपटारा किया है। सरल पोर्टल की करीब 80% सेवाओं को ऑटो-अपील सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे तय समय सीमा पार होने पर मामला स्वतः उच्च स्तर पर पहुंच जाएगा। वहीं डिजिटल रजिस्ट्रेशन सुधारों से सरकार को 15 हजार करोड़ रुपए से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि किसानों को एग्री स्टैक किसान रजिस्ट्री से जोड़ने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए। लक्ष्य है कि 15 अगस्त तक अधिक से अधिक किसानों का पंजीकरण कराया जाए, ताकि वे भविष्य की डिजिटल कृषि योजनाओं का लाभ उठा सकें।

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