हिंदू धर्म में हर तिथि का अलग-अलग महत्व है इसी के अनुसार हर तिथि के अलग गुरू भी हैं इस साल भाद्रपद माह में पड़ने वाली अमावस्या काफी खास है क्योंकि इस बार ये शनिवार के दिन पड़ रही है इस अमावस्या को कुशग्रहणी भी कहा जाता है इस दिन स्नान करके दान करने का विशेष महत्व है इस दिन शनिवार पड़ने के कारण शनि दोष, शनि की साढ़े साती और ढैय्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
क्या बन रहा विशेष योग?
भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि 26 अगस्त, शुक्रवार की दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से शुरू होगी और 27 अगस्त, शनिवार की दोपहर 01 बजकर 47 मिनट तक रहेगी चूंकि अमावस्या तिथि का सूर्योदय (उदया तिथि) 27 अगस्त को होगा इसलिए इसी दिन ये तिथि मानी जाएगी ।
शनि अमावस्या के दिन शिव और सिद्ध योग भी बन रहा है। जहां शिव योग 27 अगस्त की सुबह 2 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 2 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। वहीं, सिद्ध योग 28 अगस्त सुबह 2 बजकर 7 मिनट से शुरू हो रहा है।
शनि की साढ़ेसाती होगी दूर
इस दिन पूर्वजों के लिए दान करने की विशेष परंपरा है श्राद्ध और तर्पण से उन्हें शांति मिलती है जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है वो इसके लिए खास उपाय कर सकते हैं इस बार की अमावस्या शनि अनावस्या की वजह से और भी खास हो गई है शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या को दूर करने के लिए भी इस दिन उपाय करना लाभकारी है शनिदेव के प्रसन्न होने से जीवन की मुश्किलें दूर होती हैं।
क्या करें उपाय?
शनि की साढ़ेसाती और ढैया को दूर करने के लिए शनि अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए इसके अलावा इस दिन पीपल पर दूध, जल और मिठाई चढ़ाने से भी लाभ मिलता है इस दिन पितरों को प्रसन्न करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं शनि की साढ़ेसाती से परेशान लोगों को शनिवार और अमावस्या के योग में शनि देव की पूजा जरूर करनी चाहिए सबसे अच्छा होगा अगर आप इस दिन शनि देव के मंत्र शं शनैश्चराय नम: का जप करें और शनि देव के लिए तेल का दान करें।
आचार्य पवन तिवारी
संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिष सेवा संस्थान
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