हैलोवीन फेस्टिवल की शुरुआत आज से हो चुकी है। इस त्योहार का इतिहास भी बहुत ही पुराना है। यह सेल्टिक और ईसाई दोनों धर्मों के लोग मनाते हैं। हैलोवीन की रात साल की सबसे डरावनी रात होती है। परंतु सदियों से पहले यह प्रथा काफी बदल गई है। आज सिर्फ विदेशों में ही नहीं बल्कि भारत में भी लोग इस त्योहार को लोग बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। लेकिन इस फेस्टिवल में भूतिया कपड़े क्यों पहने जाते हैं आज आपको इस बारे में बताएंगे। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में…

हैलोवीन डे को अच्चे से मनाने के लिए लोग इस दिन डरावने कपड़े और डरावना मास्क-मेकअप करते हैं। ऐसा करने के पीछे यह मान्यता थी कि बुरी आत्माें खेती के समय धरती पर आकर फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए लोगों ने फेस्टिवल को मनाने की शुरुआत की और डरावने कपड़े पहनने लग गए। लेकिन आज भी इस त्योहार को लेकर कई सारी कहानियां हैं। 

पहले के समय में हैलोवीन मिस्टिकल रिचुअल्स यानी हल्के-फुल्के मनोरंजन और खेलों के रुप में मनाते थे। जैसे मृत्कों से जुड़ने के लिए कुछ हैवी कॉन्सेप्ट को फ्यूचर के बारे में बताने के लिए हल्के-फुल्के कपड़े को आइडिया में भी बदल देते थे। सेब के लिए बॉबिंग, ऑल हैलोज ईव पर एक भाग्य-बताने वाले खेल के रुप में यह त्योहार लोकप्रिय हो गया। हैलोवीन की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई थी। 

हैलोवीन दिवस को ऑल हेलोस इवनिंग, ऑल हैलोवीन, ऑल होलोस ईव और ऑल सैंट्स ईव भी कहते हैं। हैलोवीन पर लोग एक-दूसरे के घर जाकर कैंडी गिफ्ट करते हैं। खोखले कद्दू में आंखे, नाक और मुंह बनाकर उसमें मोमबत्ती रख देते हैं। 

हैलोवीन में लोग अपने घरों में जैक ओ लैंटर्न बनाते हैं। इसी के आधार पर अपने घर को एक डरावना लुक देते हैं। पश्चिमी देशों में कद्दू को बहुत ही शुभ माना जाता है। इसलिए हैलोवीन वाले दिन नारंगी रंग के कद्दू को खोखला करके उसमें नाक, आंख और मुंह बनाकर उस कद्दू में मोमबत्ती जलाकर दरवाजे पर या फिर पेड़ पर टांग देते हैं। माना जाता है कि इससे घर में बुरी आत्माएं नहीं आती। हैलोवीन खत्म होने के बाद कद्दू को जमीन में भी दफना दिया जाता है। इसके अलावा पड़ोसी लोग आपसे में एक-दूसरे को कैंडी और चॉकलेट तोहफे भी गिफ्ट के रुप में देते हैं। माना जाता है कि इससे रिश्तों में मिठास बनी रहती है। त्योहारों में हर कोई नए कपड़े पहनता है लेकिन हैलोवीन एक ऐसा त्योहार है जिसमें पुराने और गंदे कपड़े पहने जाते हैं। इस दिन को ओर भी अच्छे से मनाने के लिए लोग एक जगह पर इकट्ठा होकर देर रात तक गेम्स और डांस भी करते हैं। 

पश्चिम देशों में लोग हैलोवीन डे पर कई सारे गेम्स भी खेलते हैं जिनमें से एक एप्पल बोबिंग भी है। एप्पल बोबिंग में गहरे पानी के टब में फल डाले जाते है। फिर सेब को एक-एक करके निकालना होता है। जो जल्दी और सारे फलों में से एप्पल को जल्दी निकाल लेता है वह जीत जाता है। पहले ये त्योहार सिर्फ पश्चिमी देशों में ही मनाते थे लेकिन अब यह भारत में भी लोकप्रिय हो रहा है। भारत में खासकर यह मुंबई फैशन और फिल्म इंडस्ट्री में इस त्योहार का चलन बढ़ रहा है। 

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