पति की दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं। इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं कुछ जगहों पर मान्यता है कि अविवाहित कन्याएं यदि इस व्रत को करती हैं तो उन्हें मनाचाहा वर प्राप्त होता है। करवा चौथ का त्योहार देशभर में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल करवा चौथ का व्रत गुरुवार 13 अक्टूबर 2022 को रखा जाएगा। करवा चौथ की पूजा के लिए शाम 05:54 से 07:03 का समय शुभ रहेगा।
करवा चौथ का व्रत शुरू करने से एक दिन पहले महिलाएं रात्रि में सरगी करती है। इसमें फल, मेवे, मिठाइयां, नए कपड़े और सजने-संवरने का सामान होता है। सरगी की थाली वैसे तो सास अपनी बहू को देती है। लेकिन यदि किसी कारण सास से सरगी न मिल पाए तो आप खुद भी सरगी कर सकते हैं। सरगी करने के बाद से ही करवा चौथ का व्रत शुरू हो जाता है।
करवा चौथ की पूजा के लिए इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. इस दिन नए वस्त्र पहनें और पूरे 16 श्रृंगार करें. शुभ मुहूर्त पर पूजा करें। भगवान शिव, माता पार्वती, गणेशजी और कार्तिकेय की पूजा करें।
