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हरियाणा में गाय की तेरहवीं पर 11 गांवों को दिया गया न्योता, लगाया गया 650 किलो रसगुल्लों का भोग

हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव तिहाड़ खुर्द में गाय के प्रति श्रद्धा और सेवा का ऐसा उदाहरण देखने को मिला। गांव निवासी मंजीत तिहाड़ा के परिवार ने 7 जुलाई को निधन होने वाली अपनी प्रिय गाय ‘नंदिनी’ की तेरहवीं पूरी धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न कराई। परिवार ने नंदिनी को केवल एक पशु नहीं, बल्कि घर की सदस्य और मां का दर्जा दिया था। इसी कारण उसके अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक की सभी रस्में इंसानों की तरह निभाई गईं। इस अवसर पर हवन-यज्ञ, गौ-आरती, श्रद्धांजलि सभा और 11 गांवों के लोगों के लिए विशाल महाभोज का आयोजन किया गया।

करीब 18 वर्षों तक परिवार के साथ रहने वाली नंदिनी से घर के सभी सदस्यों का गहरा भावनात्मक रिश्ता था। मंजीत तिहाड़ा ने बताया कि नंदिनी तीन महीने की बछड़ी के रूप में उनके घर आई थी। बाद में उसकी मां की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई, जिसके बाद पूरे परिवार ने उसे बेटी की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया। परिवार के अनुसार, उस समय घर में कोई बेटी नहीं थी, इसलिए नंदिनी से उनका लगाव और अधिक बढ़ गया। घर के बच्चों ने उसके साथ खेलते हुए बचपन बिताया और उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। आज भी उसकी 6 पीढ़ियां परिवार के पास मौजूद हैं।

तेरहवीं समारोह में आसपास के 11 गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, गौभक्त और साधु-संत पहुंचे। सभी ने नंदिनी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार की गौसेवा भावना की सराहना की। लोगों का कहना था कि आज के समय में जहां कई लोग दूध देना बंद होने पर गायों को बेसहारा छोड़ देते हैं, वहीं यह परिवार वर्षों तक गौसेवा कर समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गौ माता के प्रति सम्मान और सेवा का संकल्प भी दोहराया।

इस अवसर पर परिवार ने बेसहारा गौवंश की बढ़ती समस्या को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने सरकार से मांग की कि दूध देना बंद होने के बाद गायों को सड़कों पर छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए और ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। परिवार का कहना था कि गौसेवा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में गायों की देखभाल की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

तेरहवीं में विशेष रूप से 6 क्विंटल रसगुल्ले तैयार करवाए
परिवार ने बताया कि नंदिनी को रसगुल्ले बेहद पसंद थे। इसी वजह से उसकी आत्मिक शांति के लिए आयोजित तेरहवीं में विशेष रूप से 6 क्विंटल रसगुल्ले तैयार करवाए गए। श्रद्धालुओं के लिए आलू और पेठे की सब्जी, पूरी तथा अन्य प्रसाद की व्यवस्था भी की गई। कार्यक्रम की शुरुआत विशेष हवन कुंड में 11 पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ करीब 45 मिनट तक चले हवन-यज्ञ से हुई। इसके बाद गौ-आरती की गई और नंदिनी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। सबसे पहले 21 ब्राह्मणों को प्रसाद वितरित किया गया और फिर हजारों श्रद्धालुओं को पारंपरिक तरीके से जमीन पर बैठाकर भोजन कराया गया

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