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रोहतक में नशा कारोबारियों पर फिर चला निगम का पीला पंजा- मकान मालिक ने कुछ पुलिस कर्मचारियों पर लगाए 10 लाख रूपये घर न गिरने देने, मंथली व मुखबरी करने जैसे संगीन आरोप

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रोहतक के खोखरकोट में नशा तस्कर द्वारा बनाए गए 3 मंजिला मकान पर बुधवार को प्रशासन का बुलडोजर चला। इस दौरान आसपास के लोग भी एकत्रित हो गए। जिसे नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस बल ने लोगों को नियंत्रित करने का प्रयास किया और पसीना बहाना पड़ा। यहां तक कि रोती-बिलखती महिलाओं व बच्चों के बीच ही मकान ध्वस्त किया।

उधर, नशा तस्करी का आरोपी जोगेंद्र अपने मकान को टूटता देख खुद को रोक नहीं पाया। जिसके बाद उसने पुलिस पर मकान नहीं तोड़ने के लिए 5 दिन पहले ही 10 लाख रिश्वत लेने का आरोप लगाया। उसने कहा कि पुलिस वाले ही उस पर पहले नशीले पदार्थों की तस्करी करने का दबाव बनाते थे। वे मकान न तोड़ने की एवज में 10 लाख रुपए लेकर गए हैं।

प्रशासन द्वारा पिछले काफी समय से नशा तस्करी में संलिप्त लोगों के अवैध मकानों पर पीला पंजा चलाया जा रहा है ताकि नशा तस्करी जैसे अपराधों की रोकथाम की जा सके। इसको देखते हुए बुधवार को प्रशासनिक अधिकारी व भारी पुलिस बल रोहतक खोखराकोट में में पहुंचा। जहां पर जोगेंद्र के 3 मंजिला मकान पर पीला पंजा चलाया।

पुलिस के अनुसार जोगेंद्र नशा तस्कर है और काफी समय से यही काम करता है। यहां तक कि उसकी मां भी नशा तस्करी में संलिप्त थी। नशा तस्करी के चलते वे जेल में भी जा चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी उनमें कोई सुधार नहीं आया। अभी भी वह नशा तस्करी में संलिप्त है। जबकि जोगेंद्र ने कहा कि वह अब नशा तस्करी छोड़ चुका है।

जोगेंद्र ने आरोप लगाया कि पहले उसके घर पर नोटिस लगाकर गए थे। इसके बाद करीब पांच दिन पहले CIA-1 के कर्मचारियों सहित 4 पुलिस वालों ने उससे मकान को बचाने के लिए 10 लाख रुपए की मांग की थी। जिसके बाद उसने पुलिस वालों को 10 लाख रुपए दे दिए, लेकिन अब उसका मकान तोड़ने के लिए भी प्रशासन आ गया।

जोगेंद्र ने आरोप लगाया कि उससे नशा तस्करी पुलिस वाले ही करवाते थे। इसके एवज में उससे डेढ़ लाख रुपए तक मंथली लेते थे। पुलिस वाले बोलते थे कि नशा तस्करी बिना डर के करो तुम्हें कुछ भी नहीं होने देंगे। साथ ही पुलिस की ताकत दिखाते हुए उससे मंथली रुपए लेते थे। अब करीब 7 माह से उसके यहां कोई भी नशा तस्करी नहीं करता।

जोगेंद्र ने कहा कि यह मकान उन्होंने पिता की कमाई से बनाया है। उसके पिता ठेकेदार हैं और सड़कों के ठेके लेते थे। साथ ही उनके पास सुअर व भेड़ भी थे। उन्होंने मकान बनाने के लिए सुअरों व भेड़ों को बेच दिया। लेकिन अब प्रशासन ने उनके मकान को तोड़कर परिवार को बेघर कर दिया है।

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