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हरियाणा में 1 प्रिंसिपल के पास 3 कॉलेजों की जिम्मेदारी:104 में पद खाली, लेक्चरर एसेसिएशन बोली-2011 से नहीं हुई सीधी भर्ती

​​​​​हरियाणा के कॉलेजों में प्रिंसिपलों का टोटा इस कदर है कि एक प्रिंसिपल के

पास 3-3 कॉलेजों की डीडी पावर है। डीडी पावर की परेशानी पहले भी प्रिंसिपल और प्रोफेसर बता चुके हैं। लेकिन विभागीय कार्रवाई का भय दिखाकर उन्हें चुप करवा दिया गया।

हरियाणा उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने 26 सितंबर को जींद के राजकीय कॉलेज प्रिंसिपल सत्यवान मलिक को सफीदों के राजकीय कॉलेज और महिला कालेज सफीदों की डीडी पावर भी सौंपी गई है।इसके अलावा भी जींद के एसोसिएट प्रोफेसर सुनीता दुग्गल को अलेवा कॉलेज की डीडी पावर सौंपी गई है। 24 सितंबर को भी रोहतक के जसिया कॉलेज की डीडी पावर संभाल रही डॉ. सुदेश लाठर को गोहाना महिला कॉलेज की डीडी पावर सौंपी गई थी। वहीं हरियाणा कॉलेज कैडर लेक्चरर एसेसिएशन ने प्रिंसिपलों की जल्द सीधी भर्ती करवाने की मांग की है।

हरियाणा उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने 26 सितंबर को जींद के राजकीय कॉलेज प्रिंसिपल सत्यवान मलिक को सफीदों के राजकीय कॉलेज और महिला कालेज सफीदों की डीडी पावर भी सौंपी गई है।

इसके अलावा भी जींद के एसोसिएट प्रोफेसर सुनीता दुग्गल को अलेवा कॉलेज की डीडी पावर सौंपी गई है। 24 सितंबर को भी रोहतक के जसिया कॉलेज की डीडी पावर संभाल रही डॉ. सुदेश लाठर को गोहाना महिला कॉलेज की डीडी पावर सौंपी गई थी। वहीं हरियाणा कॉलेज कैडर लेक्चरर एसेसिएशन ने प्रिंसिपलों की जल्द सीधी भर्ती करवाने की मांग की है।

हरियाणा के कॉलेजों में डीडी (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग) पावर लेने से इनकार करने वाले प्रोफेसरों को 2 जुलाई को चेतावनी पत्र जारी हुआ था। उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी कॉलेजों को पत्र जारी कर चेतावनी दी है कि डीडी पावर से मुंह मोड़ने वाले प्रोफेसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग पावर का मतलब है, किसी व्यक्ति या अधिकारी को वित्तीय लेनदेन करने, विशेष रूप से धन निकालने और खर्च करने का अधिकार होना

हरियाणा के 56 फीसदी सरकारी कॉलेजों में प्रिंसिपल नहीं हैं। प्रदेश के कुल 184 कॉलेजों में से 104 कॉलेज प्रिंसिपल की बाट जोह रहे हैं। काम चलाने के लिए सहायक प्रोफेसरों को अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।

लंबे समय से न तो सहायक प्रोफेसरों की पदोन्नति हुई है और न ही प्रिंसिपल के पदों पर सीधी भर्ती हो पाई है। इसका नतीजा ये है कि पिछले कई साल से कॉलेजों को मुखिया नहीं मिल रहे हैं।

कॉलेज में प्रिंसिपल सबसे अहम पद होता है। इसकी जिम्मेदारी कालेज में शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कार्यों की होती है। साथ ही पढ़ाई को लेकर शेड्यूल तैयार करने समेत निगरानी का जिम्मा भी होता है। इनके अलावा, अन्य गतिविधियों से लेकर प्रदेश और केंद्र की योजनाओं को भी लागू कराना होता है।

चूंकि सहायक प्रोफेसरों में से ही किसी को अतिरिक्त कार्यभार दिया जा रहा है, ऐसे में संबंधित विषय के विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होना तय है। दूसरा प्रिंसिपल नहीं होने से कॉलेजों में गुटबाजी भी बढ़ती है और साथ के ही स्टाफ से काम लेना अस्थायी प्रिंसिपल के लिए आसान नहीं है।

हॉयर एजूकेशन विभाग की ओर से कॉलेज प्रिंसिपल के लिए 75 फीसदी पद पदोन्नति से भरे जाते हैं, जबकि 25 फीसदी पदों को सीधी भर्ती से भरा जाता है। कॉलेज शिक्षकों का कहना है कि 2013 के बाद से विभाग की ओर से प्रिंसिपल की सीधी भर्ती नहीं की गई है। इससे पहले 25 फीसदी पदों को सीधी भर्ती से भरा जाता था और शेष पदों को पदोन्नति से भरा जाता था।

सीधी भर्ती को लेकर उच्चतर शिक्षा विभाग की ओर से कई बार कोशिशें की गईं, लेकिन प्रस्ताव ठंडे बस्ते में ही रहे। इसलिए हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के पास प्रिंसिपल पदों की भर्ती की मांग ही नहीं हुई है।

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