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हरियाणा विधान सभा चुनाव में, राम रहीम ने मांगी इमरजेंसी पैरोल, आयोग ने पूछा- इस वक्त पैरोल देना कितना सही?

रोहतक की सुनारिया जेल में बंद में बंद डेरा सच्चा सौदा चीफ गुरमीत राम रहीम ने अब 20 दिन की परोल मांगी है। राज्य में पांच अक्टूबर तक चुनाव आचार संहिता लगी हुई है, इसे देखते हुए राज्य सरकार ने गुरमीत राम रहीम का निवेदन परामर्श के लिए चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) को भेज दिया है। द इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, CEO ने राज्य सरकार को पत्र लिख उन परिस्थितियों के बारे में पूछा है, जो चुनाव के दौरान दोषी को पैरोल पर रिहा करने को उचित ठहराती हैं।

राम रहीम इस समय रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है। उसे इस साल 13 अगस्त को 21 दिन फरलो दी गई थी। फरलो के दौरान राम रहीम बागपत में अपने एक आश्रम में रुका था। अब वह फिर पैरोल लेकर वहीं जाना चाहता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले ही उसने अधिकारियों से 20 दिन की पैरोल मांगी है।

वजह की जरूरत सिर्फ इमरजेंसी पैरोल के दौरान होती है। उन्होंने कहा कि चूंकि गुरमीत सिंह की 2024 में 20 दिन की पैरोल बाकी है, इसलिए कारण बताने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि पैरोल आम तौर पर डिविजनल कमिश्नर लेवल पर अप्रूव की जाती है। हालांकि चुनाव आचार संहिता की वजह से, जेल विभाग ने सरकार के जरिए इस केस को चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर को भेज दिया है।

CEO को लिखे पत्र में सरकार ने कथित तौर पर इस बात का जिक्र किया है कि चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों में पैरोल मामलों के लिए उसकी मंजूरी की जरूरत नहीं है। हालांकि एक सोर्स ने स्पष्ट किया, “उन्हीं दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि सरकार को पैरोल के लिए आपातकालीन और बाध्यकारी परिस्थितियों में CEO से परामर्श करना चाहिए। चूंकि हरियाणा सरकार के पत्र में इन परिस्थितियों का उल्लेख नहीं किया गया था, इसलिए CEO ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।”

एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर दोषियों को चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद छोड़ा नहीं जाता है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार ने CEO को सिर्फ एक केस परामर्श के लिए भेजा है। लोकसभा चुनाव के दौरान सिर्फ तीन पैरोल केस CEO को भेजे गए थे

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