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‘विधायक बनवाना हो तो चाबी हमारे पास’11 साल जेल में रहे रामपाल के दरबार में नेताओं की कतारBJP विधायक बोले- आपके आशीर्वाद से पहली बार खिला कमल

लगभग 11 साल जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आए सतलोक आश्रम संचालक रामपाल के दरबार में नेताओं का पहुंचना लगातार जारी है। भाजपा, कांग्रेस, जजपा, समाजवादी पार्टी और पंजाब के कई नेता उनके आश्रम में पहुंचकर आशीर्वाद ले चुके हैं। अब सोनीपत के खरखौदा से भाजपा विधायक पवन खरखौदा भी वही अपनी अर्जी लगाने पहुंचे है । जिसमें वे रामपाल के चरण स्पर्श कर अपनी चुनावी जीत का श्रेय उन्हें देते दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो में विधायक पवन खरखौदा कहते हैं कि खरखौदा विधानसभा क्षेत्र में पहली बार भाजपा की जीत हुई और यह रामपाल के आशीर्वाद से संभव हुआ। इसके जवाब में रामपाल कहते हैं, “हमारे पास सब चीज की चाबी है। विधायक बनवाना हो या खेतों से पानी निकलवाना हो।”

विधायक ने जीत का श्रेय रामपाल को दिया

15 जून को धनाना स्थित सतलोक आश्रम पहुंचे विधायक पवन खरखौदा ने रामपाल के सामने हाथ जोड़कर कहा कि उनके आशीर्वाद से ही खरखौदा में पहली बार कमल खिला। उन्होंने बताया कि 2014 में निर्दलीय चुनाव लड़ा और हार गए, 2019 में भी जीत नहीं मिली, लेकिन रामपाल की शरण में आने के बाद पहली बार विधायक बने।

विधायक ने कहा, “मेरे लिए सबसे बड़ा तीर्थ यही धाम है।” इस पर रामपाल ने जवाब दिया, “हमने कह दिया था कि यह काम करना है, सब मेरे से ही चलता है।”

पहले भी चर्चा में आ चुका है BJP विधायक का वीडियो

इससे पहले हिसार के नलवा से भाजपा विधायक रणधीर पनिहार का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में वे रामपाल के सामने दंडवत होकर नामदीक्षा की मांग करते दिखाई दिए थे। रामपाल ने उन्हें पहले ज्ञान लेने और नियम-शर्तें समझने की सलाह दी थी।

जमानत के बाद नेताओं का बढ़ा आना-जाना

रामपाल को 10 अप्रैल 2026 को हिसार सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा किया गया था। वह करीब 11 साल 4 महीने 24 दिन जेल में रहे। रिहाई के बाद से उनके आश्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का पहुंचना लगातार जारी है।

कौन-कौन नेता पहुंचे रामपाल के दरबार

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

भाजपा, कांग्रेस, जजपा और अन्य दलों के नेताओं के लगातार आश्रम पहुंचने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर ऐसे समय में जब पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और हरियाणा में भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, रामपाल के दरबार में नेताओं की बढ़ती मौजूदगी को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।

हालांकि नेताओं का कहना है कि वे धार्मिक आस्था और सामाजिक कार्यों के चलते आश्रम पहुंचे, लेकिन लगातार सामने आ रहे वीडियो और बयानों ने इस मुद्दे को राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया है।

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